आर्य केंद्रीय सभा की ओर से महर्षि दयानंद जन्मोत्सव एवं बोधोत्सव के उपलक्ष्य में मानव सेवा संघ में यज्ञ किया गया।
यज्ञ ब्रह्म प्रियंवदा जी वेद भारती (नजीबाबाद) के ब्रह्मत्व में 31 हवन कुंडों पर 124 यजमान दंपतियों ने एक साथ बैठकर यज्ञ संपन्न किया। यज्ञ ब्रह्म ने कहा कि प्रत्येक मनुष्य को प्रतिदिन ब्रह्मयज्ञ और देवयज्ञ करना चाहिए।
वैदिक विद्वान स्वामी धर्मबंधु (गुजरात) ने कहा कि महर्षि याज्ञवल्य ने कहा है कि यदि आप स्वर्ग चाहते हैं तो यज्ञ करो। यज्ञ में जो प्रार्थना होती है वह सारे विश्व के कल्याण के लिए होती है।
महर्षि ब्यास ने कहा है कि जिस के अंदर संतोष, संयम, सत्य आचरण, जितेन्द्रिय दानी, विनम्रता सहित ये आठ गुण हों वही आर्य होता है और वही यज्ञ करने का अधिकारी होता है।
दुनिया के सभी प्राणियों को सबसे पहले आक्सीजन की आवश्यकता होती है। यज्ञ द्वारा वायुशोधन होता है। एक तोला गाय का घी एक टन वायु को शुद्ध करता है। वायु के शुद्धिकरण से जलशोधन भी होता है और यज्ञ द्वारा हम संसार का उपकार करते हैं।
वही परम पिता परमात्मा का प्रिय होता है। सांयकाल के सत्र में ऋषि जन्मोत्सव पर बोलते उन्होंने कहा कि संसार की कुल आबादी के 60 प्रतिशत लोग ईश्वर को मानते हैं और 40 प्रतिशत लोग विश्वास नहीं रखते।
ईश्वर को मानने की पद्धति अलग-अलग है, लेकिन ऋषि दयानंद वैदिक धर्म को ही आगे बढ़ाया। जन्मोत्सव के अध्यक्ष धर्मपाल आर्य ने कहा कि हमें ऋषि दयानंद उस समय में फैली हुई कुरीतियाें बाल विवाह, अंध विश्वास, मूर्ति पूजा, छुआछूत, और गुरूडम वाद जैसी समाज में फैली कुरीतियों को दूर किया।
हमें ऋषि दयानंद के बताए मार्ग पर चलकर अपने जीवन को सफल बनाना चाहिए। आर्य भजनोपदेशक भानुप्रकाश (बरेली) ने भजनों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।