संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। सदर बाजार स्थित उत्तम औषधालय में माता राम प्यारी मंदिर में कथा में प्रवचन करते हुए कथा व्यास स्वामी सत्यानंद तीर्थ महाराज ने कहा कि जब तक मनुष्य अपने जीवन से अहंकार और स्वार्थ को नहीं मिटाता, तब तक उसे आत्मिक सुख की प्राप्ति नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि भगवान की कृपा उसी को प्राप्त होती है, जो अपने कर्मों से ईमानदार और अपने भावों से निर्मल होता है।
इस अवसर पर पंडित ऋषि कुमार ने बताया कि कैसे राजा बलि ने अपने गुरु शुक्राचार्य की सलाह के विपरीत जाकर भगवान वामन देव को अपना सर्वस्व अर्पित किया और ईश्वर की परीक्षा में खरे उतरे। इस कथा के माध्यम से उन्होंने समझाया कि जब तक व्यक्ति अपने भीतर के अहंकार और मोह को नहीं त्यागता, तब तक सच्चे ज्ञान और भक्ति का मार्ग नहीं खुलता।
पंडित चेतन देव ने कहा कि प्रभु के नाम का स्मरण ही जीवन की सबसे बड़ी साधना है। उन्होंने कहा कि भक्ति में मन को स्थिर कर लेने वाला व्यक्ति किसी भी विपरीत परिस्थिति में विचलित नहीं होता।वहीं पंडित शेखर शर्मा ने कहा कि कर्म और भक्ति का संतुलन ही सच्चे जीवन की पहचान है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे अपने कर्मों में सेवा और समर्पण को सर्वोपरि रखें।