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आर्थिक तंगी से जूझ रहा है नेशनल स्तर का दिव्यांग खिलाड़ी

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handicaped sportsman Gulab singh
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नेशनल और स्टेट लेवल पर गोल्ड मेडल जीतने के बाद भी व्हील चेयर का दिव्यांग खिलाड़ी गुलाब सिंह आर्थिक मदद के लिए भटक रहा है। एक तरफ तो सरकार खेलों को बढ़ावा दे रही है। वहीं, प्रतिभावान खिलाड़ी मदद को भटक रहा है। दो बार तो मंत्री से मिल चुका है, लेकिन वहां से केवल आश्वासन ही मिला है। हालात ये रहे तो खिलाड़ी को मजबूरी में खेल ही छोड़ना पड़ सकता है।
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हम बात कर रहे हैं प्रतिभावान खिलाड़ी गुलाब सिंह की, जिन्होंने नेशनल और स्टेट लेवल पर 6 मेडल जीते हैं। लेकिन आज आर्थिक मदद के लिए खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के मंत्री कर्णदेव कांबोज से दो बार गुहार लगा चुके हैं, लेकिन उसे आज तक आर्थिक मदद नहीं मिल पाई। गुलाब ने बताया कि वह गांव सलारू इंद्रीका रहने वाला है और अनुसूचित जाति से संबंध रखता है और उसकी आर्थिक स्थिति काफी कमजोर है। वह 23 जून, 2017-18 को मंत्री से दो बार व्हील चेयर फैंसिंग उपकरण के लिए लिखित में दो बार पत्र दे चुका है, लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई। गुलाब ने बताया कि उनकी मदद गांव का सरपंच पलविंद्र सिंहराज करते हैं, पहले भी सरपंच ने उनकी मदद की है।
गलत इंजेक्शन से गई टांग
गुलाब जब वह 5 वर्ष के थे, तब गलत इंजेक्शन गलने से उनकी दाई टांग खराब हो गई। मजदूर पिता पर जैसे मुसीबतों का पहाड़ टूट गया। एक तरफ भागदौड़ भरी जिंदगी और दूसरी तरफ हाथ में बैशाखी। हाथ में बैशाखी आई, लेकिन इंद्री के सलारू गांव के गुलाब से हिम्मत नहीं हारी और 2016 में व्हील चेयर फैंसिंग में कूद पड़े। दो साल के कड़े अभ्यास के बाद नेशनल पर 2 ब्रांज, 2 सिल्वर व स्टेट लेवल पर 2 गोल्ड मेडल जीते। गुलाब की मुसीबतें ज्यादा थीं, लेकिन हिम्मत और हौसला कहीं अधिक। फैंसिंग से जुड़े 11 महीने की कड़ी मेहनत रंग लाई और राष्ट्रीय स्तर पर दो ब्रांज मेडल जीत लिए। उसके बाद छत्तीसगढ़ की नेशनल व्हील फैंसिंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीत पर हरियाणा का खाता खोला।
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अपनी ट्राईसाइकिल कर दी थी दान
गुलाब सिंह को 26 जनवरी को रेडक्रॉस की तरफ से उन्हें एक ट्राईसाइकिल मिला। तीन चार दिन बाद जब वह बाजार से जा रहा था तो उसने हाथ पैरों से लाचार दिव्यांग को देखा उसके हाथों में छाले पड़े थे, गुलाब का मन पसीज गया और उसने वह ट्राईसाइकिल उसे दे दी। पिता प्रेमचंद और माता कृष्णा देवी का कहना है उन्हें अपने बेटे पर काफी नाज है। हालात जरूर कमजोर हैं, लेकिन हौसला नहीं।
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