सीएम प्रतिनिधि के देरी से आने पर की नारेबाजी तो वापस लौटे, 10 मिनट पर दोबारा आकर लिया ज्ञापन
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। पक्की नौकरी और वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर अतिथि अध्यापकों ने प्रेमनगर स्थित मुख्यमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने अपनी मांगों के समर्थन में जमकर नारेबाजी की और सरकार पर भी वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए रोष प्रकट किया।
मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि संजय बठला दो घंटे तक ज्ञापन लेने नहीं आए। इससे अतिथि अध्यापकों का गुस्सा बढ़ गया। काफी इंतजार के बाद जैसे ही मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि ज्ञापन लेने आए तो उन्होंने नारेबाजी शुरू कर दी। नारे सुनकर संजय बठला वापस चले गए। करीब 10 मिनट बाद दोबारा वह आए, तब उन्होंने ज्ञापन लिया।
प्रदर्शन की अगुवाई कर रही महिला विंग की प्रधान मेनका शर्मा ने की। उन्होंने कहा कि अतिथि अध्यापकों का गुस्सा सरकार के प्रति है। उनके साथ सौतेला व्यवहार किया जाता है। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले गेस्ट टीचरों के पदों को खाली नहीं माना जाता था। एक नियमित अध्यापक की तुलना में बगैर कोई सुविधा के एक तिहाई वेतन पर काम कर रहे गेस्ट टीचरों के पदों को खाली मानकर मेवात, सिरसा से यमुनानगर, कैथल से गुरुग्राम जैसे 200 से 300 किलोमीटर दूर क्षेत्रों में जबरदस्ती ट्रांसफर कर दिया। इस अवसर पर महिला विंग की राज्य उपाध्यक्ष मेनका शर्मा, मंजु शर्मा, मंजु राणा, विनोद कुमार, राजेश कुमार शर्मा, किरणपाल राणा, रणधीर सिंह, नरेश मीत, राजेश कुमार, राकेश कुमार, सुभाष व सुरेश आदि मौजूद रहे।
2014 के चुनाव में की थी घोषणा
जिला प्रधान जसमेर सिंह ने कहा कि 2019 में सरकार ने गेस्ट टीचरों के 58 वर्ष तक की सेवा सुरक्षा का नाम देकर एक सजा देने का एक्ट बनाया। वर्तमान सरकार ने 2014 के चुनावी घोषणा पत्र में वादा किया था कि सरकार बनते ही पहली कलम से सभी 15 हजार गेस्ट टीचरों को नियमित किया जाएगा। लेकिन 9 वर्ष का समय बीत जाने के बाद भी आज स्थिति वैसी ही है। अगर जल्द उनकी मांगें पूरी नहीं होती तो वह सरकार के खिलाफ कड़ा फैसला ले सकते हैं।