संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिले के 21 गांवों के भूजल स्तर में सुधार हुआ है। गिरते भूजल स्तर को देखते हुए अटल भूजल योजना के तहत प्रथम चरण में करनाल खंड की 41 ग्राम पंचायतों को लिया गया था।
इनमें उन पंचायतों को शामिल किया गया जहां भूजल का दोहन तथा भूजल का संकट सबसे ज्यादा था। अब इनमें से 21 गांवों के भूजल स्तर में सुधार देखने को मिला है।
यह सफलता योजना के तहत कार्यरत भूजल विशेषज्ञों व सूचना, शिक्षा व संप्रेषण (आईईसी) विशेषज्ञों के समूचे प्रयास से मिली है। करनाल में 2021 में योजना का क्रियान्वयन किया गया। तब से अब तक टीम के सदस्य लगातार भूजल स्थिति में सुधार के लिए कार्य कर रहे हैं। इस कार्य के लिए योजना के तहत लोगों को आईईसी गतिविधि के तहत विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर भूजल के दोहन को रोका जा रहा है।
वहीं पीजोमीटर व पानी की गहराई मापक यंत्र के माध्यम से ग्रामीणों को वर्तमान भूजल स्तर से अवगत करवाया जाता है। योजना के तहत हर वर्ष इन चिह्नित 41 गांवों के भूजल की स्थिति, पानी की उपलब्धता व खपत, वर्तमान में पानी का दोहन किस गांव में ज्यादा है तथा मानव व पशुओं द्वारा पानी की खपत और कृषि में पानी की वास्तविक खपत का अनुमान लगाकर जल सुरक्षा प्लान तैयार किए जाते हैं।
सर्वे रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान में 41 ग्राम पंचायतों के 52 गांवों में एक लाख 11 हजार 995 जनसंख्या रहती है जिनमें 57610 पुरुष व 54385 महिलाएं हैं। इन पंचायतों में 18052 हेक्टेयर भूमि कृषि योग्य तथा 82.8 जंगल हैं। भौगोलिक क्षेत्र 29171 में यमुना नदी बेसिन और घग्गर आंशिक रूप से बेसिन पानी बहता है।
योजना में शामिल गांव ःअटल भूजल योजना में करनाल खंड की 41 ग्राम-पंचायतों में अब्दुलापुर, अंधेडा दिलावरा, बजीदा जाटांन, भूसली, बुढ़नपुर, छपरा जागीर, चुंडीपुर, चुरनी जागीर, डबरकी, डबरकीपार, दरड़, ढाकवाना गुजरान, ढाकवाला रोड़ान, गंजोगढ़ी, काछवा, कलामपुर, खरकाली, कुराली, मिरघान, मोहियूदिनपुर, मुस्तफाबाद, नगला मेघा, नलवीपार, नसीरपुर, पुंडरक, रंबा, रांवर, रसूलपुर कलां, रसूलपुर खुर्द, रतनगढ़, रुकानपुर, सालारू, संगोहा, संगोही, सरफाबाद माजरा, शेखपुरा जागीर, सोहाना, सुभरी, टपराना, टिकरी, ऊंचा समाना शामिल हैं।
अटल भूजल योजना अभी भारत के सात राज्यों में चलाई जा रही है और हरियाणा के 14 जिलों में 36 खंडों में चल रही है। करनाल के खंड करनाल के 41 गांवों में समुदाय की भागीदारी के साथ आगे बढ़ रही है। गांव स्तर पर भूजल जन आंदोलन को बल देने की दिशा में गांव स्तर पर भूजल सहेलियां नियुक्त की गई हैं जो ग्रामीण आंचल में लोगों के व्यवहार बदलने के लिए प्रयासरत हैं। स्वयंसेवी महिलाएं भूजल बचाने के लिए निर्णायक भूमिका निभा रही हैं।