संवाद न्यूज एजेंसी
मूनक/करनाल। सफाई और ट्रिमिंग के नाम पर अवैध रूप से पेड़ काटे जा रहे हैं। बड़ागांव के बाद अब बेगमपुर में भी हरे पेड़ काटने का मामला सामने आया है। यह कार्य करीब एक महीने से जारी है। एचएसआईआईडीसी ने औद्योगिक क्षेत्र की सड़कों के पास खड़े पेड़ों की ट्रिमिंग और सफाई का टेंडर जारी किया था लेकिन बिना परमिशन के करीब हजारों क्विंटल पेड़ काटकर खुर्द-बुर्द किए जा चुके हैं। हालांकि कुल कितने पेड़ काटे जा चुके हैें इसका सही पता जांच के बाद ही चलेगा। डीएफओ नरेश रंगा ने बताया कि मामला संज्ञान में है जांच के लिए रेंज ऑफिसर को लगाया गया है।
गांव बेगमपुर के पास सरकार द्वारा करीब 987 एकड़ भूमि पर विकसित औद्योगिक क्षेत्र में फैक्ट्रियों के प्लॉट काटे गए थे लेकिन वहां फिलहाल दर्जन भर यूनिट ही चालू हैं। बाकी खाली पड़ी भूमि में पेड़ खड़े थे जिनको बेचा जा रहा है जबकि टेंडर के अनुसार औद्योगिक क्षेत्र में खड़े पेड़ों की सिर्फ टहनियों को काटा जाना था। पेड़ काटने को लेकर वन विभाग से कोई परमिशन नहीं ली गई। हैरानी की बात है कि बेगमपुर में करीब एक महीने से अवैध रूप से पेड़ों की कटाई चल रही है, लेकिन वन विभाग के अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई।
विभाग ने न तो पेड़ों की कटाई के लिए अनुमति ली, न पेड़ काटकर बेचने के लिए नीलामी की। औद्योगिक क्षेत्र की भूमि से काटे गए पेड़ों को रोजाना ट्रालियों में भरकर बेचा जा रहा है। लोगों ने बताया कि ठेकेदार 250 रुपये प्रति क्विंटल के रेट पर लकड़ी बेच रहा है और अब तक सैकड़ों ट्रालियां लकड़ी की बेची जा चुकी हैं।
बेगमपुर के समीप बने इंडस्ट्रियल एरिया में सड़क किनारे खड़े पेड़ों की ट्रिमिंग करवाई गई है। छोटे-मोटे पेड़ कटे होंगे, बड़े साइज के पेड़ नहीं कटवाए गए।
राजबीर, एक्सईएन एचएसआईआईडीसी
मामला संज्ञान में आया है, वन विभाग से पेड़ों को काटने के लिए परमिशन नहीं ली गई है। जांच के लिए रेंज ऑफिसर की ड्यूटी लगा दी है।
- नरेश रंगा, डीएफओ, करनाल