पाबंदी के बावजूद राजकीय उच्च विद्यालय कलामपुरा खोल दिया गया और स्कूल में क्लास भी चल गई। छठी से आठवीं तक के करीब 10 बच्चों को महिला अध्यापक पढ़ा रही थीं। टीचर और बच्चों ने मास्क भी नहीं लगाए थे। मंगलवार को किसी ने इसकी वीडियो वायरल कर दी। बताया जा रहा है कि इस स्कूल में दो-तीन दिन से कक्षाएं लग रही थी। मामले को लेकर जब स्कूल प्रिंसिपल से बात की गई तो उन्होंने कहा कि बच्चे किताबें लेने आए हैं। वहीं लाइब्रेरियन ने स्कूल पर झूठ बोलने के आरोप लगाकर कहा कि स्कूल मनमर्जी कर रहा है। इस मामले में संज्ञान लेते हुए डीसी निशांत यादव के निर्देश पर डीईओ रविंद्र कुमार ने जांच कमेटी बना दी है। जिसकी रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होगी। पिछले दिनों लॉकडाउन में एक निजी स्कूल भी खुला मिला था। मौके पर पहुंचे डीईओ ने स्कूल को सील किया था। वहीं स्कूल प्रिंसिपल के खिलाफ भी मामला दर्ज हुआ था।
अध्यापक बोले-बच्चों के पास नहीं मोबाइल, हेड टीचर बोलीं, किताबें लेने आए बच्चे
कलामपुरा के एक टीचर ने कहा कि सभी बच्चों के पास मोबाइल नहीं है। इसीलिए जिनके पास मोबाइल नहीं है उन्हें बुला लिया था।
वहीं हेड टीचर सीमा ने बताया कि लाईब्रेरी बुक इश्यू कराने व मिडे डे मील के पैसे एकाउंट में जमा कराने के लिए बच्चे आए थे। स्कूलों में बच्चों को पढ़ाया नहीं जा रहा है। जबकि शिक्षकों और बच्चों का आरोप है कि वे खुद भी क्लास ले रही थीं।
लाइब्रेरियन बोली, सबके पास है फोन, कोई किताबें लेने नहीं आया
स्कूल लाइब्रेरियन मीना ने स्कूल के एक लेक्चरर पर आरोप लगाते कहा कि वे उनसे कह रहे हैं कि बच्चे किताबें लेने के लिए स्कूल आएं हैं। जबकि ऐसा नहीं है। हम काफी बच्चों को बुक्स दे चुके हैं। सभी बच्चे हमारे व्हाट्स एप पर जुड़े भी हैं। बच्चे रोज आ रहे हैं। कुछ ही बच्चों के पास फोन नहीं हैं। स्कूल नियमों की अनदेखी कर रहा। यदि बच्चों को कोरोना हो जाता है तो उसका जिम्मेदार कौन होगा? शिक्षा विभाग द्वारा स्कूल के स्टॉफ को बुलाया जा रहा है। साथ ही स्कूल में एडमिशन के नाम पर बच्चों को भी बुलाया जा रहा है।
राजकीय उच्च विद्यालय कलामपुरा स्कूल में बच्चों को बुलाकर पढ़ाई कराने के मामले में टीम गठित कर दी है। जिसकी अभी जांच चल रही है, जांच के बाद ही विभाग की ओर से कार्रवाई की जाएगी।
-रविंद्र चौधरी, जिला शिक्षा अधिकारी, करनाल