संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से वसंत विहार में आयोजित श्रीकृष्ण कथा में आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी दिवेशा भारती ने प्रवचन करते हुए कहा कि जब द्वापर युग में कंस ने अत्याचारों से संपूर्ण मानवता को पीड़ित किया तब धरती मां व्यथित हो उठी। उसी क्षण श्री हरि के चरणों में पुकार करती है, तब प्रभु उसकी पुकार सुनकर अवतार लेते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रभु का प्रकटीकरण पुनः धर्म, सत्य, न्याय की स्थापना करता है। क्योंकि प्रभु आते ही इसलिए हैं। जब जब भी एक इंसान पथभ्रष्ट हो जाता है। अपने आचरण, व्यक्तित्व को खत्म कर मानव न रहकर दानव बन जाता है, तब-तब प्रभु आते हैं। यह सत्य हैं। आज के वर्तमान समय में यदि झांक कर देखें तो पता चलता है किस प्रकार एक इंसान अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाता है।
उसे प्रभु का भय नहीं रहा, बुरे कर्मो का डर नहीं रहा। आज अखबारों में पढ़ते हैं, टीवी के माध्यम से सुनते हैं कि किस प्रकार से इंसान के आचरण में गिरावट आ गई है। जब भी ऐसा होता है तब प्रभु भक्तों की पुकार सुनकर एक गुरु रूप धारण कर अवतरित होते हैं। प्रभु का प्रत्यक्ष प्रकटीकरण समाज में पुनः धर्म, सत्य, न्याय की स्थापना करता है। पतन की पगडंडियों पर चल रहे मानव समाज की बांह थाम कर उसे अध्यात्म के मार्ग की ओर अग्रसर करते हैं।