माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। दिल्ली से करनाल तक रैपिड रेल की परियोजना के लिए जियोटेक्नीकल इन्वेस्टिगेशन यानी भू-तकनीकी जांच का काम शुरू हो गया है। करनाल के बलड़ी के नजदीक बनने वाले अंतिम स्टेशन के नजदीक सीईजी टेस्ट हाउस एवं रिसर्च सेंटर की टीम ने मिट्टी के नमूने लेने का काम शुरू कर दिया है। सेंटर के इंजीनियरों की टीम करनाल से गन्नौर तक करीब 100 फुट नीचे तक की गहराई से मिट्टी के नमूने लेकर भू-तकनीकी जांच करेगी।
सेंटर के प्रोजेक्ट मैनेजर शिवचरण पोसवाल ने बताया कि भू-तकनीकी जांच का काम करीब चार माह तक चलेगा। इसके बाद ही आगामी कार्य हो सकेंगे। उन्होंने बताया कि अलग-अलग स्तर पर मिट्टी की जांच की जाती है। इसमें मिट्टी और जमीन की स्थिति का आंकलन किया जाता है कि जहां पर निर्माण किया जाना है, वहां की स्तह कैसी है। जांच के बाद ही आगामी कार्य होते हैं। उन्होंने बताया कि उनकी जांच रिपोर्ट के आधार प रही आगामी डिजाइन और अन्य कार्य हो सकेंगे। वे अपनी रिपोर्ट एनसीआरटीसी को सौंपेंगे।
जरूरी है है भू-तकनीकी जांच
प्रोजेक्ट मैनेजर ने बताया कि भू-तकनीकी जांच किसी भी बड़ी परियोजना में निर्माण से पहले मिट्टी और चट्टान की मजबूती, प्रकार और भूमिगत जल स्तर की जांच करने की प्रक्रिया है। यह सुरक्षित और किफायती फाउंडेशन, ढलान स्थिरता और संरचनात्मक विफलताओं से बचने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो फील्ड परीक्षण (बोरिंग, सैंपलिंग) और प्रयोगशाला विश्लेषण के माध्यम से की जाती है।
केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी से पहले जरूरी है जांच
नमो भारत काॅरिडोर परियोजना यानी रैपिड रेल के करनाल तक विस्तार के लिए सर्वे के बाद अब केवल केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी का इंतजार है। इस स्वीकृति के बाद धरातल पर इस वर्ष में काम शुरू हो जाएगा तो वर्ष 2029 की शुरुआत तक दिल्ली से करनाल तक रैपिड रेल में लोग सफर कर सकेंगे। फिलहाल सर्वे के बाद कागजी प्रक्रिया को पूरा करने में जिला प्रशासन और अन्य विभाग जुटे हुए हैं। केंद्रीय मंत्री एवं करनाल के सांसद मनोहर लाल के अनुसार, कैबिनेट की स्वीकृति जल्द हो जाएगी, इसके लिए प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। परियोजना के तहत सराये काले खा को छोड़कर 17 नए स्टेशन बनाए जाने हैं।