- एक ही राशि में होंगे चंद्रमा और बृहस्पति, भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की होगी पूजा
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। अक्षय तृतीया 30 अप्रैल को है। इस दिन 100 साल बाद गजकेसरी राजयोग बन रहा है, यह एक दुर्लभ और शुभ योग है जो धन, समृद्धि और सफलता देने वाला है। गजकेसरी राजयोग तब बनता है जब चंद्रमा और बृहस्पति ग्रह एक ही राशि में होते हैं।
यह योग धन, समृद्धि और सफलता के लिए शुभ माना जाता है और यह 100 साल बाद बन रहा है। इस दिन श्रद्धालु भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा और व्रत करते हैं। अक्षय तृतीया का दिन अबूझ मुहूर्त में से एक माना जाता है, क्योंकि इस दिन शुभ कार्य के लिए मुहूर्त निकलवाने की जरूरत नहीं होती। अक्षय तृतीया के दिन सूर्य और चन्द्रमा दोनों ही अपनी उच्च राशि में स्थित होते हैं।
श्री श्याम बाला जी ज्योतिष केंद्र के संचालक पंडित विनोद शास्त्री के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन, विवाह, नया वाहन, गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य किए जाते हैं। इस दिन देवताओं ने 24 रूपों में अवतार लिया था, जिसमें छठा अवतार भगवान परशुराम था।
शास्त्री के अनुसार, अक्षय तृतीया पर सोना खरीदने की परंपरा है। कहा जाता है कि इस दिन खरीदे गए सोने का कभी क्षय नहीं होता है जिसमें हमेशा वृद्धि होती है। वहीं पवित्र नदियों में स्नान, दान, ब्राह्मण भोज, कर्म, हवन और भगवान की उपासना जैसे उत्तम कार्य इस तिथि पर अच्छे फल देते हैं। पंडित विनोद के अनुसार अक्षय तृतीया पर घर में सोने चांदी की वस्तुएं लानी चाहिए। अक्षय तृतीया पर दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 29 अप्रैल को शाम पांच बजकर 31 मिनट पर शुरू होगी। वहीं इसका समापन अगले दिन यानी 30 अप्रैल को दोपहर दो बजकर 12 मिनट पर होगा। अक्षय तृतीया का पर्व 30 अप्रैल को मनाया जाएगा।
अक्षय तृतीया के 14 महादान
विनोद शास्त्री ने बताया कि अक्षय तृतीया पर गाय, जमीन, तिल, सोना, घी, कपड़े, धान, गुड़, चांदी, नमक, शहद, मटकी, खरबूजा दान करना काफी फायदेमंद होता है। कन्यादान भी इस शुभ तिथि पर करने की मान्यता है।