संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। साहित्यिक मंच मन की उड़ान की ओर से एमडीडी बाल भवन में आयोजित मुशायरे में कवियों और शायरों ने रचनाएं पेश कीं। मुशायरे की अध्यक्षता वरिष्ठ शायर डॉ. एसके शर्मा ने की। मुख्य अतिथि पूनम गोयल और विशिष्ट अतिथि अजय गोयल रहे।
शुरुआत सरस्वती वंदना से डॉ. वर्षा सिंह ने की। डॉ. एसके शर्मा ने कहा कि मोहब्बत को शिद्दत से निभा यूं दिल्लगी न कर...। शायर गुलजार जिगर देवबंदी ने कहा- जरा सी बात पर बेटा बगावत पर उतर आया। डॉ. कमर रईस ने कहा- खराश हर कदम सहना पड़ा। कवि प्रेम पाल सागर ने बोले- बाहरी आवरण खूब सजा रहे हैं लोग। यूपी से आए शायर नवाजिश नजर ने कहा - इश्क में वो पहलू बदल रहा है।
शायर इकबाल पानीपती ने कहा- हुई मुझसे खता हंसते-हंसते। पूनम गोयल ने कहा- सोचो वो शख्स कितना अच्छे से जानता होगा। तनवीर फिरोजाबादी बोले- तेरी मिसाल ढूंढ के लाऊं कहां से मैं, सौ बार कह चुका हूं तू बेमिसाल है। जमाल हसनपुरी ने कहा कि अब चिरागों को जलाने की जरूरत क्या है। डॉ अंजू शर्मा ने कहा जानती हूं उन पर मरता है ये, कितना दगाबाज हुआ जाता है।
कवयित्री सीमा रंगा ने कहा - बाल विवाह अजब बीमारी बचपन को खा जाती है। अशोक आबशार बोले- देने वाले मुझे उसकी बंदगी भी दे। डॉ. नाथूलाल ने कहा- आज भी लोगो में वफा ढूंढ रहा हूं। डॉ. वर्षा सिंह ने कहा- कैंडल न जलाएंगे वहशी पापी को फांसी लटकाएंगे। डॉ. मनोज फगबाड़ीने बोले- हर ओर यहां यारों मायूस सिपाही हैं। भारत भूषण ने कहा शहीदों को नमन मेरा।
इसके अलावा ममता प्रवीण, सत्या कोहंड, आशीष बैंसन, कर्मजीत सिंह, कुमारी खुशबू और संजोत सिंह ने रचना पढ़ी। शुभारंभ एमडीडी बाल भवन के संस्था संस्थापक पीआर नाथ, अध्यक्ष परमिंदर पाल सिंह, मंच संस्थापक रामेश्वर देव,संजोत सिंह, संस्था कार्यकारी अधिकारी सुरेंद्र सिंह मान ने किया। इस अवसर पर प्रशासन के आला अधिकारियों सहित रचनाकार महाबीर मैहला, अशोक मलंग,इरफान अंसारी, राजपाल, सुरेन्द्र कल्याण सहित भारी तादाद में श्रोतागणों की उपस्थिति रही।