कौन कहता है आसमां में छेद हो नहीं सकता... एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो! यह पंक्तियां हमेशा हौसले और साहस को बढ़ावा देती हैं। करनाल के वॉलीबॉल कोच सुल्तान सिंह का जीवन भी ऐसे ही हौसले की कहानी है।
कैंसर की जिस जानलेवा बीमारी का नाम सुनते ही बड़े-बड़ों के हौसले जवाब दे देते हैं, उस बीमारी को सुल्तान सिंह खेल के मैदान में रोज पटकनी दे रहे हैं। राहड़ा गांव के रहने वाले सुल्तान सिंह करनाल कर्ण स्टेडियम में वॉलीबॉल कोच के पद पर 1992 से कार्यरत हैं।
1994 में करनाल में शिफ्ट हो गए थे। दिसंबर 2007 में उन्हें से पता चला कि उन्हें कैंसर है। यह पता चलते ही जैसे मौत आंखों के सामने आकर खड़ी हो गई। जनवरी 2008 को जब उन्हें पीजीआई में दाखिल करवा दिया गया। उसके बाद सात दिन करनाल मुंगा अस्पताल में एडमिट रहे।
उस दौरान उनके सारे बाल झड़ चुके थे। उन्होंने बताया कि कैंसर होने से पहले उनका वजन 96 किलो था, लेकिन सात दिन अस्पताल में एडमिट होने के बाद उनका वजन केवल 56 किलो रह गया था। उन्होंने धीरे-धीरे बिखर चुकी हिम्मत को बटोरा और बिस्तर छोड़कर खेल के मैदान में उतर आए। कर्ण स्टेडियम में जिमनास्टिक कोच राजरानी ने उनको प्रेरित किया।
पत्नी बनी हिम्मत
जब हरियाणा कोचिज एसोसिएशन को इस बात को पता चला कि वो कैंसर से पीड़ित हैं तो एसोसिएशन ने उनका सहयोग करने के साथ साथ नियमों में परिवर्तन कर दिया। परिवार की ओर से भी उन्हें पूरा सहयोग प्राप्त हुआ। उनकी पत्नी अस्थमा से पीड़ित है। वह अपनी बीमारी को भूलकर अपने पति की हिम्मत बन गई। खास बात तो यह कि एडमिट होने केे अलावा उन्होंने बाद में एक भी छुट्टी नहीं ली। अस्पताल से आते ही उन्होंने स्टेडियम में आना शुरू कर दिया था। स्टाफ के कहने के बावजूद वह अपने सेंटर से दूर नहीं रहे। उन्हें चिंता रहती थी कि कहीं उनके खिलाड़ी अनुुशासन न भूल जाएं।
यह है सुल्तान की उपलब्धि
सुल्तान सिंह ने बीए 1986 में दयाल सिंह कॉलेज से की है। वॉलीबॉल का नार्थ जोन में गोल्ड मेडलिस्ट रह चुके हैं। ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी में सुल्तान सिंह के मार्गदर्शन में 11 खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल चुके हैं। 2006 में थाइलैंड में हुए वॉलीबॉल वर्ल्ड यूथ कप हुआ था, उनमें तीन खिलाड़ी दर्शन सिंह , सुरजीत सिंह व रामपाल भारत की टीम में शामिल थे। उस समय फाइनल मैच ब्राजील के साथ हुआ था और भारत दूसरे नंबर पर रहा था। दर्शन सिंह व सुरजीत सिंह वर्तमान में एचएसआईआईडीसी पंचकूला में कार्यरत हैं।