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सवा लाख क्यूसेक पानी से ही दरकने लगे यमुना के किनारे

Thu, 24 Jul 2014 12:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/करनाल
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इंद्री। यमुना क्षेत्र में यमुना की धारा का प्रवाह मोड़ने के लिए बनाए गए स्टड यमुना में छोडे गए मात्र सवा लाख क्यूसेक पानी से ही दरकने लगे हैं।
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कई जगहों पर स्टड में लगे पत्थर नीचे धंस गए हैं। स्टड के नीचे खिसकने से सिंचाई विभाग के अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। लोगों का कहना है कि यमुनाकी ओर से छोड़े गए सवा लाख क्यूसेक पानी से ही इन स्टडों का ये हाल है आगे क्या होगा?

गौरतलब है कि यमुना तटों को मजबूत बनाने और यमुना की धारा का प्रवाह मोड़ने के लिए स्टड का निर्माण किया जाता है। इसके लिए सरकार करोड़ों रुपये का बजट भेजती है। सिंचाई विभाग की ओर से यह पैसा खर्च कर स्टड बनाए जाते हैं। करीब एक सप्ताह पूर्व यमुनानगर के हथनीकुंड बैराज से करीब सवा लाख क्यूसेक पानी यमुना में छोड़ा गया था। हालांकि यह पानी यमुना से बाहर नहीं निकला, फिर  भी यह पानी सिंचाई विभाग द्वारा किए गए कार्यों की पोल खोल गया।
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डबकौली घाट पर पांच स्टड नए बनाए गए हैं, जबकि आठ की मरम्मत की गई है। इनमें से करीब चार स्टड के पत्थर नीचे घंस गए हैं। किसान ओमपाल मंढाण ने बताया कि स्टड बनाते समय नियमों को ताक पर रखा गया है। जिस गहराई पर स्टड का निर्माण शुरू किया जाता है। वहां तक खुदाई ही नहीं की गई है। इसके कारण स्टड नीचे धंस गए हैं। उन्होंने कहा कि रिबिटमेंट (स्टड के बीच की जगह) भरने के लिए ब्लैक कोल या मिट्टी से भरे कट्टे लगाने चाहिए। फिलहाल अधिकारियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया है।

 ग्रामीणों ने मांग करते हुए कहा पहाड़ी क्षेत्रों में तेज बारिश के कारण किसी भी समय यमुना में बाढ़ की स्थिति बन सकती है। इसके खतरे को रोकने के लिए स्टड पूरी तरह से दुरुस्त किए जाए। प्रशासन की ओर से एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए मोटर बोट की सही तरीके  से मरेम्मत की जाए क्योंकि बीते वर्ष कई मोटर बोट यमुना की धारा के बीच ही बंद हो जाती थी। इन्हें चलाने वालों के पास पेट्रोल उपलब्ध नहीं होता था। गांवों में पहुचने के लिए  ग्रामीणों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ती थी।
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 क्षेत्र के लोगों ने देखी थी विभीषिका
बीते वर्ष 16 जून को यमुना में आई बाढ़ की विभीषिका क्षेत्र के लोग भलि भांति देख चुके है। इस बाढ़ के कारण अटूट तटबंध भी देखते ही देखते ढह गए थे। चाराें ओर पानी ही पानी दिखाई दे रहा था। साढे आठ लाख क्यूसेक पानी के कारण इस क्षेत्र में फसल, सब्जियां, पशु चारा सहित सब कुछ बर्बाद हो गया था। हालांकि मुख्यमंत्री ने लोगों के  जख्मों पर मरहम लगाने के लिए विशेष गिरदावरी करवा कर मुआवजा  देने की बात कही थी, परंतु सीएम के जाने के बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई। क्षेत्र के लोगों को फिर से चिंता सता रही है।

इन गांवों को है खतरा
यमुना में आए पानी से सबसे ज्यादा इंद्री क्षेत्र के गांव चंद्राव, चौगांवा, बुर्ज, हंसुमाजरा, मुखाला, मुखाली, गढीबीरबल, गढपुर टापू, कलसौरा, जपती छपरा, नबियाबाद, डेरा हलवाना, बीबीपुर, डबकौली, डबकौली खुर्द, कमालपुर गडरियान, शेरगढ़ टापू, सिकंदरपुर, खिराजपुर, महमदपुर कई गांवों में बाढ़ का खतरा बना रहता है। इन गांवों के लोग हर वर्ष यमुना के पानी से प्रभावित होते हैं।
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9 करोड़ खर्च कर बनाए स्टड
सिंचाई विभाग की ओर से इंद्री क्षेत्र की सीमा में करीब 25 नए स्टड बनाए हैं। इसके अलावा पिछले वर्ष बनाए गए स्टडों की मरम्मत भी की गई है। सिंचाई विभाग के एक्सईएन मनीष शर्मा ने बताया कि इन्हे बनाने के लिए करीब 9 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। स्टड निर्माण का कार्य लगभग पूरा कर लिया गया है।

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