करनाल। रोडवेज बसों की टिकट प्रक्रिया के स्मार्ट होने का अभी और इंतजार करना पड़ेगा। नए साल के बाद ही रेडवेज बसों में ई-टिकट प्रणाली लागू हो पाएगी। क्योंकि इसे सभी बसों में लागू करने से पहले विभाग की ओर से लिए गए चार ट्रायल फेल हो चुके हैं। ऐसे में ईटीएम (इलेक्ट्रानिक टिकटिंग मशीन) प्रोजेक्ट पर काम कर रही कंपनी ने इसे पूरी तरह से शुरू करने के लिए विभाग से तीन माह का समय मांगा है। ताकि सॉफ्टवेयर को अपडेट करके कार्य करने लायक बनाया जा सके।
करनाल में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरुआत करने से पहल ट्रायल के तौर पर 10 मार्गों पर चल रही बसों में ईटीएम से टिकट काटने की व्यवस्था की गई थी। करीब एक माह से ज्यादा समय तक चले इस प्रयोग में परिचालकों के साथ-साथ यात्रियों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कभी मशीन ने गलत मार्ग की टिकट जारी कर दी तो कभी सही मार्ग की टिकट पर किराया ज्यादा लगा दिया। इसके अलावा मशीनों में डेबिट-क्रेडिट कार्ड से भी भुगतान करने में परेशानी आई। ऐसे में कंपनी ने तीन माह का समय मांगा है, ताकि सॉफ्टवेयर को अच्छे से अपडेट करके इन मार्गों पर दोबारा ट्रायल लिया जा सके।
खामियों के कारण पांच माह से लटक रही योजना
विभाग की ओर से जून माह में ई-टिकट प्रणाली शुरू की जानी थी। इसके लिए मई माह की शुरुआत में 166 मशीनें भी डिपो को भेज दी गई थी। नए प्रोजेक्ट को समय से सिरे चढ़ाने के लिए सभी परिचालकों को दो-दो चरणों में प्रशिक्षण भी दिया गया है। बावजूद इसके सॉफ्टवेयर की खामी के कारण पहले ट्रायल नहीं शुरू हो पाया। अब एक माह में चार बार हुए ट्रायल में कई समस्याएं सामने आ गई हैं।
इसलिए शुरू कर रहे ई-टिकट प्रणाली
- फ्लाइंग टीम को पता चलेगा कि किस समय यात्री का टिकट काटा गया है।
- कर्मचारियों का ड्यूटी रोस्टर भी रोजाना ऑनलाइन अपने आप मशीन में दर्शाएगा कि आज किस बस पर किस चालक-परिचालक की ड्यूटी है।
- मशीन में कैमरा भी होगा, यदि बस में कोई अप्रिय घटना होती है तो कंडक्टर मशीन से वीडियो या फोटो भी बना सकेगा।
- खुले पैसे का झंझट खत्म होगा। बस यात्रियों को डेबिट या क्रेडिट कार्ड से भी टिकट लेने की सुविधा मिलेगी।
- मुख्यालय बैठे अधिकारी एक क्लिक पर यह जान सकेंगे कि किस डिपो की किस बस में किस समय कितने यात्री सवार हैं और बस मार्ग पर कहां है।
- बस पास और फ्री यात्रा श्रेणी के लोगों का भी जीरो बैलेंस टिकट कटेगा। इससे रिकॉर्ड में रहेगा कि कौन कितना सफर करता है।
- मशीन से स्कैन होते ही बस पास के असली-नकली होने का पता चलेगा।
वर्जन-
फोटो-- 124 नंबर है।
ई-टिकट प्रणाली के ट्रायल के दौरान कई दिक्कतें सामने आईं। कंपनी की ओर से तीन माह का समय मांगा गया है। उम्मीद है ट्रायल में पहले सफलता मिल जाए। यदि ऐसा हुआ तो जल्द इस व्यवस्था को शुरू कर देंगे।
- कुलदीप सिंह, जीएम, रोडवेज करनाल डिपो
Four trials fail, e-ticketing system may be implemented in roadways buses after the new year