2013-14 से 2015-16 बीच जिले के चार राइस मिलों ने भारतीय खाद्य निगम को 18.57 करोड़ रुपये का चूना लगा दिया है। इन राइस मिलों ने 50 हजार क्विंटल से अधिक के सीएमआर की हेराफेरी की है। मंगलवार को जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक (डीएफएससी) निशांत राठी की अगुवाई में टीम ने पुलिस बल के साथ चारों मिलों को सील कर दिया है। इस कार्रवाई से राइस मिल संचालकों में हड़कंप मचा है।
जिला खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति नियंत्रक निशांत कुमार राठी की अगुवाई में विभागीय टीम मंगलवार को सबसे पहले करनाल के राइस मिल आशीर्वाद फूड पर पहुंची। इस राइस मिल के संचालकों ने 2013-14 में 52769.85 क्विंटल धान सीएमआर के कार्य के लिए लिया था लेकिन एफसीआई को 35355.80 क्विंटल चावल के सापेक्ष सिर्फ 13473.85 क्विंटल चावल ही लौटाया। 75224098 रुपये कीमत के 21881.95 क्विंटल चावल की हेराफेरी कर ली। जिसकी एफआईआर 23 फरवरी-2018 को दर्ज कराई गई थी। इस राइस मिल को सील करने के बाद टीम कुंजपुरा के चौधरी फूड राइस मिल पर पहुंची। इसे भी सील कर दिया गया। इस पर 2015-16 में 11512.97 क्विंटल चावल की हेराफेरी कर सरकार को 36099074 रुपये का नुकसान पहुंचाने का आरोप है। फिर टीम करनाल के अन्नपूर्णा एग्रो राइस मिल पर पहुंची। इस मिल को भी सील कर दिया। डीएफसी ने बताया कि इस मिल ने 2014-15 में 15989.84 क्विंटल सीएमआर की हेराफेरी कर सरकार को 50576298 रुपये का नुकसान पहुंचाया है। इसके बाद टीम काछवा के कृष्णा फूड राइस मिल पर पहुंची। इस राइस मिल ने 2014-15 में 39620 क्विंटल धान लिया था। 26545 क्विंटल के स्थान पर सिर्फ 1774.95 क्विंटल चावल ही दिया। 8770.45 चावल न देकर सरकार को 26811617 रुपये का नुकसान पहुंचाया है। इस तरह चारों राइस मिलों ने 51159.71 क्विंटल सीएमआर की हेराफेरी की है और सरकार को 185711087 रुपये का नुकसान पहुंचाया है। इन चारों राइस मिलों को सील कर दिया गया है। इनके खिलाफ पहले ही संबंधित थानों में एफआईआर दर्ज कराई चुकी हैं।