करनाल में अगर आपको या किसी परिचित को कुत्ता काट जाए और आप ट्रामा सेंटर की इमरजेंसी में इलाज के लिए पहुंचे, तो आपको रैबीज का इंजेक्शन नहीं लगेगा।
इंजेक्शन लगवाने के लिए या तो आपको सुबह ओपीडी खुलने का इंतजार करना होगा या फिर आप जैसे तीन ओर कुत्ता काटने के मरीज होंगे तो ही आपको रैबीज लगाया जाएगा। यह हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि ट्रामा सेंटर में जो नियम विभाग ने तय किए हैं, वह बता रहे हैं। कहने तो करनाल में कल्पना चावला के नाम पर मेडिकल कॉलेज शुरू हो गया है, परंतु यहां एंटी रैबीज इंजेक्शन तक की व्यवस्था नहीं है।
यह मामला अमर उजाला ने करीब एक साल पहले भी उठाया था। तब तत्कालीन सीएमओ डा. शिवकुमार ने दावा किया था कि ट्रामा सेंटर में भी रैबीज की व्यवस्था होगी। यह घोषणा भी स्वास्थ्य मंत्री राव नरेंद्र सिंह के सामने की गई थी, लेकिन सारे दावा फुस हो गए हैं। स्थिति एक साल बाद भी ज्यों की त्यों है।
रविवार को जब एक बच्ची काजल को कुत्तों ने नोंच लिया तो इलाज के लिए परिजन उसे ट्रामा सेंटर ले आए। पहले तो रविवार, दूसरा देर शाम का समय। ऐसे में परिजनों को ट्रामा सेंटर ने रैबीज लगाने से मनाही कर दी। बाद में परिजन बाहर बाजार से करीब पौने चार सौ रुपये का इंजेक्शन लेकर आए, तो बच्ची का इलाज शुरू हो सका।
ऐसे में मेडिकल कॉलेज बनाने का आम आदमी को क्या लाभ होगा। वह भी तब, जब बच्ची के परिजन गरीब हैं और जैसे-तैसे दो जून की रोटी चल रही है। दरअसल, विभाग ने नियम बना रखा है कि एंटी रैबीज का इंजेक्शन केवल ओपीडी में ही लगेगा। वह भी तब, जब कम से कम चार मरीज होंगे। क्योंकि एक इंजेक्शन में चार डोज होती है।
इंजेक्शन की सील खुलने के बाद उसे लंबे समय से तक खुला रखना उचित नहीं रहता है। इसलिए विभाग ने यह नियम बना दिया। इमरजेंसी में तो यह सुविधा भी नहीं है। ऐसे में कुत्ते के काटने के दोपहर बाद आने वाले मरीजों को अपनी ही जेब हलकी करनी पड़ रही है।
पूरी नहीं हो पा रही है मांग
इस बारे में कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज के निदेशक डा. सुरेंद्र कश्यप का कहना है कि एंटी रैबीज की मांग पूरी नहीं हो पा रही है। दूसरा यह इंजेक्शन महंगा है और एक साथ चार डोज होते हैं। वह कहते हैं कि ओपीडी में रोजाना बीस से 25 लोग इंजेक्शन लगाने के लिए आते हैं।
इनका कहना है कि ट्रामा सेंटर में यह इंजेक्शन लगाना संभव नहीं है। भले ही फिर इमरजेंसी कितनी ही क्यों ना हो? जब उनसे पूछा गया कि चाहे किसी की जान चली जाए, तो भी नियम नहीं बदला जा सकता है क्या? तो उन्होंने कहा कि वह इस बारे में पता करके बताएंगे।