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यमुना में उफान : इंद्री, करनाल और घरौंडा में अलर्ट, कंट्रोल रूम स्थापित

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हिमाचल प्रदेश में तेज बारिश और हथिनीकुंड बैराज से 8.29 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के कारण यमुना में उफान आ गया है। शनिवार की रात से यमुना में पानी का बहाव तेज होने से ग्रामीणों की धड़कने भी तेज हो गई हैं। रविवार दिनभर इंद्री, करनाल और घरौंडा खंड के ग्रामीण यमुना के जलस्तर पर नजरें गढ़ाए हुए थे। रविवार सुबह यमुना में करीब तीन लाख क्यूसेक पानी आने से जलस्तर बढ़ता गया और दोपहर बाद तक फसलें जलमग्न हो गईं। यमुना बीच के टापू में यूपी के कुंडा घाट गांव के कुछ किसान और चरवाहे अपने पशुओं के साथ रविवार शाम तक फंसे नजर आए। रविवार शाम तक हथिनीकुंड बैराज से 7.60 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। प्रशासन ने कंट्रोल रूम स्थापित कर हेल्प लाइन नंबर जारी कर दिए हैं। साथ ही कई विभागों को भी चौकन्ना रहने को कहा गया है। देर शाम हथिनीकुंड बैराज से 8.29 लाख क्यूसेक पानी आधे घंटे के लिए छोडे़ जाने के कारण यमुना से लगते गांवों को हाई अलर्ट पर रखा गया। जो ग्रामीण यमुना में खेतों में काम करने गए थे सूचना मिलते ही वह लौट आए। जिले के तीनों खंडों में यमुना के अंदर हजारों एकड़ में लगाईं फसलें जलमग्न हो गई हैं। सुबह से शाम तक किसान यमुना की पटरी पर बैठकर बढ़ते जलस्तर और अपनी डूबती फसलों को देखते रहे। यमुना के अंदर ट्यूबवेल और इंजन इत्यादि सामान पानी में समाहित हो चुके हैं। धान की फसलें डूब गई हैं। मक्का, मूली समेत अन्य फसलें डूबने से किसानों को नुकसान हुआ है। सिंचाई विभाग का अमला दिन-रात यमुना पर डट गया है। संवेदनशील जगहों पर जेसीबी, डंपर, मिट्टी के बैग और मशीनें खड़ी कर दी हैं। पटरी पर पैनी नजर रखी जा रही है।
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करनाल खंड के कुंडा कला, खराजपुर, बजीदपुर, नबीपुर, जड़ौली व नली कलां के ग्रामीण यमुना के पटरी पर डटे हैं। उन्हें डर है कि जलस्तर बढ़ने से पटरी ना टूट जाए। चूंकि कुंडा कला व जम्मुखाला गांव के समीप यमुना के पानी का झुकाव हरियाणा की तरफ है इसलिए यहां पर पानी की सीधी टक्कर स्टड से होती है। इस जगह से पटरी टूटने का खतरा बना रहता है। कुंडा कला के समीप संवेदनशील जगह पर बनी तीन ठोकरें पानी की टक्कर को सहन करती हैं। खराजपुर गांव के किसान गुरजीत सिंह का कहना है कि जो फसलें पानी में डूब गई हैं, वह नष्ट हो जाएंगी। कई दिन तक यदि धान की फसल डूबी रही तो वह गल जाएगी। कुंडा कला के गोपाल और तेजपाल का कहना है कि पेठा, मूली व अन्य सब्जी की फसलें डूब चुकी हैं। उन्हें धान, गन्ना व चारे की चिंता है। तीन साल पहले पटरी टूटने से कुंडा कला गांव में पानी भर गया था। पानी ने नगला चौक तक मार की थी। अब जलस्तर बढ़ने से पटरी टूटने का भय बना हुआ है।
यमुना के बीच खेतों का कटाव शुरू
यमुना में हर साल उफान की वजह से जमीन का कटाव होता है। इस बार भी तेज बहाव के चलते यमुना के अंदर खेतों में तेजी से कटाव हो रहा है। सैकड़ों एकड़ जमीन खुर्द-बुर्द हो जाती है। बाद में उत्तर प्रदेश व हरियाणा के किसानों के बीच खूनी संघर्ष का कारण बनती है। चूंकि हरियाणा की तरफ यमुना के बहाव का झुकाव है इसलिए इस तरफ कटाव ज्यादा होता है। देखते ही देखते पल भर में ही काफी जमीन पानी में समाहित हो जाती है। साल दर साल कटाव के चलते यमुना के पानी की धार हरियाणा की तरफ खिसकती चली गई। दशकों पहले बनाए स्टड जो कुछ साल पहले तक नजर आते थे, वह अब जमींदोज हो चुके हैं। पानी के बीच उथल-पुथल की वजह से अधिक कटाव होता है और बाद में दोनों राज्यों के किसानों के बीच वह विवाद का कारण बनता है। इस समस्या का आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं हो सका।
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यमुना की पटरी में कई जगह हैं होल
पटरी पर बारिश का पानी जमा नहीं हो इसके लिए सिंचाई विभाग ने मजदूर लगा रखे हैं। पटरी को ग्रामीण अपने खेतों में जाने के लिए रास्ते के रूप में इस्तेमाल करते हैं इसलिए जगह-जगह कुछ पानी ठहरा हुआ है। पटरी सूखी और मजबूत बनी रहे इसके लिए विभाग का अमला वहां डटा हुआ है।
7.60 लाख क्यूसेक पानी यमुना में आ गया है। पानी की मात्रा और बढ़ेगी। इसके चलते यमुना के निकटवर्ती इलाकों में अलर्ट कर दिया गया है। यमुना की पटरी पर लेबर लगा दी गई है। विभागीय कर्मचारी दिन-रात यमुना पर ड्यूटी पर तैनात रहेंगे। ट्रैक्टर, डंपर, जेसीबी इत्यादि मशीनरी तैनात कर दी गई है। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए विभाग की पूरी तैयारी है। यदि कोई किसान या मजदूर यमुना के बीच फंसा दिखेगा तो तो उसकी हिफाजत की जाएगी। विभाग ने पूरी तैयारी कर रखी है। -नवतेज सिंह, एक्सईएन यमुना वाटर वर्क्स
शाम तक पशुओं के साथ टापू में फंसे थे चरवाहे
कुंडा घाट के समीप इलाके में यमुना में रविवार सुबह खेतों में काम करने आए कई किसान और पशु चरा रहे चरवाहे टापू के बीच फंसे गए। वह यूपी के कुंडा घाट गांव के ग्रामीण बताए जा रहे थे। वे पूरा दिन इंतजार करते रहे लेकिन जलस्तर बढ़ता गया। दिन ढलने तक वह टापू पर ही फंसे नजर आए। कई किसानों के ट्रैक्टर, ट्राली, बुग्गी इत्यादि सामान भी टापू पर नजर आ रहा था। वह किसान चारा लेने के लिए खेतों में आए थे। चारे से लदी उनकी गाड़ियां बीच टापू खड़ी रही। उन्हें लौटने का रास्ता नजर नहीं आ रहा था। हरियाणा की तरफ पटरी पर खड़े किसान भी उनकी तरफ ताकते रहे।
जिला प्रशासन ने सिंचाई विभाग, राजस्व विभाग व पशुपालन विभाग को किया चौकन्ना
जिला प्रशासन ने इंद्री और घरौंडा क्षेत्र के यमुना के साथ लगते गांवों में ग्रामीणों को सख्त हिदायत जारी कर कहा है कि प्रदेश की सीमाओं के साथ लगते पड़ोसी राज्यों में अधिक बारिश के कारण यमुना नदी उफान पर है। कोई भी नदी के पास न जाए और न ही नदी में नाव आदि लेकर जाए। उपायुक्त विनय प्रताप सिंह ने किसानों को भी यमुना तट के साथ लगते खेतों में ना जाने की अपील की है। उपायुक्त के अनुसार हथिनीकुंड बैराज से करीब साढे़ छह लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा गया है। इस कारण यह हिदायत जारी की जा रही है ताकि जान व माल के नुकसान से बचा जा सके। लोगों की सुरक्षा के लिए सिंचाई विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस विभाग को भी अलर्ट पर रखा गया है। स्वास्थ्य विभाग और पशु पालन विभाग को भी बाढ़ आने की स्थिति में राहत पहुंचाने के लिए तैयार रहने को कहा गया है। इन सभी विभागों को अगले 48 घंटे ड्यूटी पर तैनात रहने व अधिकारियों तथा कर्मचारियों को अपना स्टेशन ना छोड़ने के लिए भी आदेश दिए गए हैं। जिले में यमुना नदी के सभी किनारों पर भी नजर बनाए रखने के लिए कहा गया है। प्रशासन द्वारा बाढ़ आने की स्थिति में सभी प्रकार के बाढ़ राहत उपकरण व साम्रगी की उपलब्धता सुनिश्चित कर ली गई है तथा प्रशासन द्वारा बाढ़ कंट्रोल रूम बनाया गया है। किसी भी किनारे के टूटने तथा पानी के ओवरफ्लो होकर गांवों में घुसने की स्थिति की सूचना कंट्रोल रूम के फोन नंबर 2267271 तथा पुलिस कंट्रोल रूम के नंबर100 पर अविलंब साझा करें। उन्होंने आमजन से अपील की कि प्रशासन और सरकार आपके साथ है। आमजन को घबराने की आवश्यकता नहीं है। किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न देते हुए प्रशासन द्वारा जारी हिदायतों का पालन कर हर संभव सहयोग करें।
यमुना नदी के साथ लगते इन गांवों में जारी किया गया है अलर्ट
उपायुक्त विनय प्रताप सिंह ने इंद्री खंड के चौगामा, हंसू माजरा, चंद्राव, गढीबीरबल, नाबियाबाद, जपती छपरा, सैय्यद छपरा, कमालपुर गडरियान, डबकौली खुर्द व डबकौली कलां तथा कुंजपुरा खंड के शेरगढ़ टापू, जडौली, नबीपुर, कुंडा कलां आदि गांवों को अलर्ट पर रखा गया है। करनाल खंड के जम्मूखाला, मुस्तफाबाद, ढाकवाला गुजरान व दिलावरा तथा घरौंडा खंड के लालूपुरा, सदरपुर, मुंडीगढी और बलहेडा आदि गांवों में यमुना के पानी आने की सूचना जारी की गई है।
यमुना में पानी के बहाव की तेज गति देख सहमे लोग
हथिनीकुंड बैराज से यमुना में पानी छोड़े जाने से क्षेत्र के किसान सहम गए हैं। पानी के प्रवाह को देखकर ग्रामीण भयभीत हैं। उनका कहना है कि इस साल पानी के बहाव की गति पहले की अपेक्षा तेज है। क्षेत्र में बाढ़ का खतरा भी बढ़ गया है। इंद्री क्षेत्र के दर्जनों गांव यमुना से सटे हैं। रविवार सुबह यमुना में करीब तीन लाख क्यूसेक पानी ही बताया गया। ग्रामीणों ने कहा कि अधिक पानी क्षेत्र में भारी तबाही का कारण बन सकता है। रविवार को दिन में यमुना में करीब तीन लाख क्यूसेक पानी की वजह से सैकड़ों एकड़ फसल जलमग्न हो चुकी हैं। यमुना का रौद्र रूप देखकर किसानों ने खेतों से अपना जरूरी सामान समेट लिया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यमुना में और पानी छोड़ा गया तो भारी तबाही होगी।
ट्यूबवेल की मोटरें खोलकर घर ले आए
यमुना के उफान की वजह से आसपास के किसान अपने खेतों से ट्यूबवेल की मोटरें व सामान अपने घर ले आए। लगातार बारिश से साफ है कि यमुना में जल का स्तर और बढ़ेगा। यदि ऐसा हुआ तो कई-कई किलोमीटर तक खेत पानी में डूब जाएंगे। सड़कों पर पानी जमा हुआ तो खेतों से संपर्क भी कट जाएगा। खतरे को भांपकर किसानों ने खेतों से ट्यूबवेल की मोटरें खोल ली। इसके अलावा खेती का जरूरी सामान भी अपने घर ले आए हैं।
गुमथला में खनन होनेे से बिगड़े हालात
कलसौरा निवासी जोगिंद्र सिंह, मोहन लाल, अंग्रेज सिंह, वीरेंद्र सिंह, जसपाल, सुमित कुमार व विक्रम सिंह का कहना है कि यमुना के पानी की इतनी तेज रफ्तार आज से पहले नहीं देखी। यह सब अंधाधुंध खनन की देन है। आरोप लगाया कि इस बार गुमथला के पास भारी मात्रा में अवैध खनन हुआ। यही वजह है कि पानी इतनी तेजी से आगे बढ़ रहा है। इससे किसानों का नुकसान होगा।
2013 का मंजर याद कर सहमे किसान
कलसौरा व नबियाबाद के ग्रामीण वर्ष 2013 का मंजर याद कर सहम गए हैं। ग्रामीण तहरीर अब्बास, आजाद सिंह, मुलाजिम हुसैन और धर्मवीर ने बताया कि 2013 का मंजर भुलाए नहीं भूलता। तब यमुना में करीब आठ लाख क्यूसेक पानी छोड़ दिया गया था। इसके बाद भारी तबाही हुई थी। खेतों के साथ ही कई गांव भी बाढ़ की चपेट में आ गए थे। फसलें खराब होने से किसानों की आर्थिक स्थिति डांवाडोल हो गई थी। इस हिसाब से अबकी बार जल का स्तर बढ़ रहा है उसे देखकर ग्रामीण चिंतित हैं। डर है कहीं फिर से 2013 जैसी बाढ़ का सामना न करना पड़े। ग्रामीण भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं कि यमुना में पानी का स्तर घट जाए। लेकिन मौसम के आसार देखकर नहीं लगता कि पानी आगामी कुछ दिनों में कम होगा।
इंद्री के इन गांवों पर मंडराया खतरा
इंद्री के करीब दर्जनों गांव यमुना के साथ सटे हैं। इनमें चंद्राव, चौगांवा, हंसू माजरा नबियाबाद, सैयद छपरा, जपती छपरा, कलसौरा, हलवाना, नगली, कमालपुर गडरियान व गढ़पुर टापू शामिल हैं। ग्रामीणों ने बताया कि हर बार पानी बढ़ते ही गांवों को अलर्ट कर दिया जाता था। आरोप है कि इस बार प्रशासन ने उन्हें कोई सूचना नहीं दी।
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