चकबंदी मामले में अपनी खरीदी हुई जमीन गवां चुके पांच गांवों के किसानों का अनशन शुक्रवार को पांचवें दिन में प्रवेश कर गया। शुक्रवार को गांव भरतपुर की महिलाओं ने धरना देकर प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। महिलाओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन की अनदेखी के कारण आज उन्हें भूमिहीन होना पड़ रहा है।
महिलाओं ने कहा कि इस बार पांचों गांवों के लोगों ने 12 अक्तूबर को काला दशहरा मनाने का फैसला लिया है। मौके पर संत गोपालदास भी शिरकत देंगे। अनशन पर बैठी महिला ओमशुदा, संतोष, सरोज, सावित्री, मिथिलेश, गीता, सुदेश, राममूर्ति, बाला, सुधा देवी सहित अन्य ने बताया कि प्रशासन की लापरवाही के कारण उनका परिवार सड़कों पर आ चुका है।
चकबंदी में जमीन जाने के बाद परिवार का पालन पोषण करना दूभर हो गया है। उन्होंने कहा कि अपने हक मांगने के लिए पांच दिन से महिलाएं अनशन पर बैठी हैं लेकिन प्रशासन के लोगों ने अभी तक उनकी सुध नहीं ली, केवल कोरे आश्वासनों से ही मामले को रफा-दफा करना चाहती है।
उन्होंने साफ तौर पर ऐलान कर दिया है कि अंतिम सांस तक इस लड़ाई को लड़ते रहेंगे, चाहे इस लड़ाई में हमने अपनी जान भी क्यों न गंवानी पड़े। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे कालरम निवासी प्रदीप मराठा ने कहा कि भूमाफिया से संलिप्त लोग हमारी जमीन को हथियाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देकर प्रशासन को गुमराह कर रहे हैं।
असल बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले में कहीं नहीं लिखा हुआ है कि खरीदी हुई जमीन वापस नहीं दी जाती। आईएसी के सदस्य व संत गोपालदास के प्रवक्ता जेपी शेखपुरा ने कहा कि पंद्रह साल से ग्रामीण गुलामी की जिंदगी जी रहे हैं।
ग्रामीण अब अपने हकों के लिए जाग चुके हैं। पांच गांवों के लोग लगभग दो माह से अपने हकों की लड़ाई के लिए लड़ रहे हैं लेकिन किसी भी राजनेता ने अभी तक कोई सुध नहीं ली। ग्रामीणों की लड़ाई में आहुति डालने के लिए संत गोपाल दास 12 अक्तूबर को दिल्ली से अनशन स्थल पर पहुंच रहे हैं।
पांचों गांवों के ग्रामीणों ने सामूहिक तौर से फैसला लिया है कि इस बार काला दशहरा मनाया जाएगा और भूमाफिया व भ्रष्ट प्रशासन का पुतला दहन किया जाएगा।