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पांच राइस मिलों में कम, आठ में मिले अधिक चावल

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चावल घोटाला मामले में अतिरिक्त उपायुक्त द्वारा गठित की गई छह टीमों ने रिपोर्ट सौंप दी है। जिसमें 41 राइस मिलों के फिजिकल वेरीफिकेशन में पांच राइस मिलों में चावल कम पाए गए हैं। जबकि एक राइस मिल पर ताला लगा मिला तो दूसरे राइस मिल संचालक ने टीम को अभिलेख दिखाने से ही साफ इनकार कर दिया है। आठ राइस मिल ऐसे भी हैं, जिनमें निर्धारित मात्रा से अधिक चावल उपलब्ध मिला है। इधर डीएफएससी द्वारा गठित आठ टीमों की रिपोर्ट आना बाकी है। इन टीमों ने सोमवार को भी कई राइस मिलों में चेकिंग की। इस दौरान कुंजपुरा क्षेत्र के एक राइस मिल समेत कई राइस मिलों के संचालक ताला डालकर चले गए। इन टीमों को मंगलवार को रिपोर्ट सौंपनी है, लेकिन सूत्रों का मानना है कि रिपोर्ट में विलंब संभव है।
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सरकारी धान के बदले 67 फीसदी रिकवरी का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है, क्योंकि एडीसी द्वारा गठित छह टीमों ने सोमवार को अपनी राइस मिलों के फिजिकल वेरीफिकेशन की रिपोर्ट एडीसी को सौंप दी है। एडीसी अशोक कुमार बंसल ने बताया कि सभी छह टीमों की संयुक्त रिपोर्ट तैयार करके उपायुक्त निशांत कुमार यादव को सौंप दी गई है। यहां से रिपोर्ट डीएफएससी को जाएगी। इसमें कुल 41 राइस मिलों का फिजिकल वेरीफिकेशन किया गया है, जिसमें पांच राइस मिलों में दिए गए धान के बदले 67 फीसदी रिकवरी के आधार पर काफी कम चावल मिला है। किसी किसी राइस मिल ने तो अभी बहुत कम चावल ही दिया है। इसके अलावा एक राइस मिल ऐसा मिला, जहां टीमें दो तीन बार गई लेकिन उस राइस मिल पर ताला ही लटका मिला है। राइस मिलर्स से भी संपर्क नहीं हो पाया है। इस कारण यह जानकारी नहीं हो सकी है कि इसमें कितना चावल या धान है। एक राइस मिल में जब टीम पहुंची तो राइस मिलर्स ने जांच में सहयोग नहीं किया और धान व चावल से संबंधित अभिलेख ही नहीं दिखाए हैं। इसके साथ-साथ आठ राइस मिल ऐसे भी मिले हैं, जिनमें निर्धारित मात्रा से अधिक चावल मौके पर पाया गया है। हालांकि 36 राइस मिलों को एडीसी की जांच में क्लीनचिट मिल गई है। इधर, जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक निशांत कुमार राठी ने बताया कि उनके द्वारा गठित टीमों का जांच कार्य अभी जारी है। उम्मीद है कि अगले एक दो दिनों में टीमें अपनी जांच रिपोर्ट उन्हें सौंप देंगी। इसके बाद ही गुणदोष के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। इधर सूत्रों ने बताया कि डीएफएससी द्वारा गठित फूड एंड सप्लाई इस्पेक्टरों की टीमें राइस मिलर्स के साथ नरमी से पेश आ रही हैं। कुंजपुरा क्षेत्र की एक राइस मिल पर सोमवार को टीम के नाम पर इकलौता इंस्पेक्टर पहुंचा। राइस मिल गेट पर ताला लगा था। वहीं से इंस्पेक्टर ने राइस मिलर्स से बात की और वापस लौट गया। इसी तरह अन्य राइस मिलों पर भी एक एक फूड एंड सप्लाई इंस्पेक्टर ही जांच के नाम पर खानापूर्ति करने पहुंचे। कुछ राइस मिल खुले मिले, जिसमें कुछ देर कार्यालय में बैठे और चले गए। डीएफएससी निशांत कुमार राठी इन टीमों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। उनका कहना है कि यदि कोई दोषी है तो उसके खिलाफ कोई रियायत नहीं की जाएगी। किसी निर्दोष पर कार्रवाई नहीं की जाएगी। टीमों पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है। रिपोर्ट आने पर सच्चाई सामने आ जाएगी।
पकड़े गए ट्रकों की जांच सप्ताहभर बाद भी अधर में लटकी
-छह जुलाई को जब उपमंडलाधीश नरेंद्रपाल मलिक ने यूपी से पीडीएस का चावल लेकर आए दो ट्रकों को पकड़ा तो खलबली मच गई। दोनो च्रक कहां से आए, किस राइस मिल में जा रहे थे। इन ट्रकों में कितना चावल है, वह पीडीएस का है या नहीं ? इन सब सवालों के जवाब उपमंडलाधीश की जांच में ही सामने आएंगे लेकिन एसडीएम अभी तक इसकी जांच नहीं कर पाए हैं। इधर, यह भी बताया जा रहा है कि राइस मिलों ने उस चावल के अपने दूसरे राज्यों में बैठे कारोबारी साथियों से अभिलेख तैयार करा लिए हैं। यह साबित करने का प्रयास किया जा रहा है कि वह चावल पीडीएस का नहीं बल्कि राइस मिलर्स ने अपने निजी कारोबार के लिए यूपी से मंगाया था। इसके लिए जिला प्रशासन ने राइस मिलों को पूरा सहयोग भी कर रहा है। दूसरी बात जिन राइस मिलों में छह जुलाई की चेकिंग में चावल कम मिले थे, उनके खिलाफ रिपोर्ट भी लिखाई गई थी, लेकिन उसमें भी सप्ताहभर बीत गया है लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
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पीडीएस के चावल के जरिये दो राज्यों के साथ धोखाधड़ी
-हरियाणा राज्य सरकार धान को खरीद कर राइस मिलों को कुटाई आदि करके चावल निकालने के लिए देती है, इसके बदले में राइस मिलों को कुटाई व्यय दिया जाता है। यानी राइस मिलर्स सरकार से कुटाई भाड़ा लेकर धान की कुटाई करके चावल की सप्लाई देते हैं। जिसे सरकार भारत सरकार को देती है। हरियाणा राज्य में तो सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जरिये चावल नहीं दिया जाता है लेकिन देश के अन्य राज्यों में चावल की सप्लाई पीडीएस के जरिये की जाती है। सरकार का मानना है कि एक क्विंटल धान में 67 किलो ग्राम चावल निकलता है, इसी के अनुसार राइस मिलों से धान के बदले चावल की रिकवरी ली जाती है। आरोप यह है कि राइस मिल उस समय स्वयं भी धान की खरीद करते हैं। अधिकांशत: राइस मिल चावल का बड़ा कारोबार करते हैं। विभिन्न नामों से चावलों की सप्लाई करते हैं। क्योंकि जो धान सरकार देती है, उसकी कुटाई के दौरान भी पॉलिस, टूटा दाना, दो मुंह का दाना आदि निकलता है। इसकी पैकिंग करके, साथ ही अच्छे और साबुत चावल की पैकिंग करके भी यहां के राइस मिलर्स देश के कई राज्यों में चावलों की सप्लाई करते हैं। मांग के अनुसार सरकार द्वारा दिए गए धान से निकले चावल को भी महंगे दामों पर बेच देते हैं। लेकिन सरकार को तो चावल की रिकवरी देनी ही होती है, जो चावल कम होता है, उसकी भरपाई के लिए बाहरी राज्यों से सस्ता चावल खरीदते हैं। इसमें यूपी बिहार से पीडीएस का वह चावल भी खरीदते हैं, जो उन राज्यों के कोटेदार यानी डिपो होल्डर गरीबों को वितरण करने की बजाय बेच देते हैं। इस तरह से इन चावलों से दो राज्यों में धोखाधड़ी की जाती है। पहला तो हरियाणा, जिसमें सरकार को सस्ता चावल दिया जाता है, दूसरा उस राज्य के गरीब, जिनको चावल न देकर डिपो होल्डर या सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़े अधिकारी बेच देते हैं।
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