भूस्खलन-बर्फबारी के बीच उत्तराखंड के धारचूला इलाके में फंसे करनाल के पांच लोग
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उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के धारचूला स्थित गुंजी गांव के पास हुए भूस्खलन और बर्फबारी के बीच करनाल के पांच लोग फंस गए हैं। इन लोगों में शामिल करनाल के समाजसेवी वीरेंद्र आर्य ने रोते हुए वीडियो जारी कर प्रदेश सरकार से मदद मांगी है। जिसमें उन्होंने बताया है कि वे माइनस 10 डिग्री तापमान में काफी कम कपड़ों में रह रहे हैं और रास्ते बंद होने के कारण आठ दिनों से फंसे हैं। जिस इलाके में ये लोग फंसे हैं वह उत्तराखंड का सीमांत इलाका है। ये क्षेत्र नेपाल और तिब्बत से जुड़े हैं।
आदिशक्ति मां झंडेवाली सेवा समिति के सदस्य एवं हांसी रोड निवासी वीरेंद्र आर्य सहित कुल पांच सदस्य चार अक्तूबर को उत्तराखंड स्थित ओम पर्वत आदि कैलाश के दर्शनों के लिए गए थे। लेकिन जब वे धारचूला के गुंजी गांव के पास पहुंचे तो आगे भारी बारिश, बर्फबारी के कारण भूस्खलन हो गया।
इससे रास्ते बंद होने के कारण वे आगे दर्शनों के लिए नहीं जा सके। जब उन्होंने वापस आने का प्रयास किया तो गुंजी से धारचूला की ओर आने वाला रास्ता भी भूस्खलन से बंद हो गया। अब वे वहीं पर रुके हैं। जारी वीडियो में उन्होंने बताया कि उनके साथ गुजरात के भी 35 लोग हैं। सभी की हालत ठंड से खराब हो रही है।
मोबाइल नेटवर्क बंद, परिवार चिंतित
आदिशक्ति मां झंडेवाली सेवा समिति के प्रधान राकेश लांबा ने बताया कि औद्योगिक क्षेत्र में नौकरी करने वाले वीरेंद्र आर्य के साथ उनका बेटा युवराज और समिति के सदस्य दिव्यम गुलाटी और वीरेंद्र आर्य के दो दोस्त भी साथ गए हैं। चार अक्तूबर को वे कार से करनाल से रवाना हुए थे और दर्शन करके आठ अक्तूबर को उन्हें वापस लौटना था।
लेकिन भूस्खलन के कारण वे वहीं फंसे हैं। इन हालात में उनके मोबाइल का नेटवर्क भी नहीं आ रहा। स्थानीय लोगों की मदद से उन्होंने वीडियो जारी करके संदेश दिया है। धारचूला तक वे कार से गए। आगे सड़क मार्ग ठीक न होने के कारण स्थानीय टैक्सी से सफर करना था।
हेलीकॉप्टर सेवा भी बंद
जारी वीडियो में उन्होंने कहा है कि सभी रास्ते बंद होने से उनके वाहन भी वहीं फंसे हैं। हेलीकॉप्टर से ही वे वापस आ सकते हैं, लेकिन बर्फबारी के कारण यह सेवा भी कई दिनों से बंद है।