हरियाणा में जल्द ही मछलियों की नई प्रजातियों का पालन शुरू किया जाएगा। विभागीय अधिकारियों के अनुसार नई प्रजातियों में पंगास, देशी मांगूर, जयंती रोहू, सिंघी और अमून कार्प शामिल है। यह मछलियां हाई वैल्यू फिश की श्रेणी में आती हैं जिससे मत्स्य पालकों को बेहतर मुनाफा होगा। इसके लिए विभागीय अधिकारी और कर्मचारियों को विशेष ट्रेनिंग दिलायी जा रही है, जो आगे चलकर मत्स्य पालकों को इसकी जानकारी देंगे और प्रदेश में हाई वैल्यू फिश के उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करेंगे।
हरियाणा में मछलियों के शौकीनों के लिए अच्छी खबर है। फिलहाल मत्स्य विभाग की ओर से रोहू, कतला और मृगल के उत्पादन पर जोर दिया जा रहा था, जो यहां के लिए नई प्रजाति मानी जा रही थी, लेकिन अब मत्स्य विभाग की ओर पांच नई प्रजाति की मछलियों के उत्पादन की तैयारी की गयी है। इसमें पंगास, देसी मांगूर, जयंती रोहू, सिंघी व अमून कार्प को पालने का निर्णय लिया गया है। विभाग की ओर से मत्स्य विभाग से संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को इसके लिए ट्रेनिंग भी दिलायी जा रही है। अधिकारी पहले खुद ट्रेनिंग लेंगे और इसके बाद मछली पालकों को इनके बारे में प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि इन प्रजातियों को बढ़ावा दिया जा सके। बता दें कि मत्स्य पालन का व्यवसाय दक्षिण भारत में अधिक किया जाता है, लेकिन अब उत्तरी भारत में यह कारोबार 3 से 5 प्रतिशत ग्रोथ के साथ आगे बढ़ रहा है, जिसे देखते हुए मत्स्य विभाग ने पांच अन्य प्रजातियों की मछलियों को पालने की कवायद शुरू कर दी है। इन मछलियों का बीज मार्च, अप्रैल में कोलकाता, बंगाल, चेन्नई, भुवनेश्वर आदि स्थानों से मंगवाया जाएगा।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, यह हाई वैल्यू फिश हैं, जिसके बाजार में अच्छे दाम मिलते हैं। पंगास का रेट सामान्य है, लेकिन इसकी ग्रोथ बहुत ज्यादा है। वहीं देसी मांगूर 400-450, सिंघी 550-600, अमून कार्प 150-200, जयंती रोहू 250-300 रुपये तक बाजार में बेची जा सकती है। देसी मांगूर व सिंघी पानी से बाहर आकर हवा में सांस लेती है अगर कभी तालाब का पानीं गंदा हो जाए तो जीवित रही सकती है। करनाल जिले में है 406 मछली पालक हैं, जिनमें घरौंडा 58, असंध 62, नीलोखेड़ी 94, करनाल 61, इंद्री 65, निसिंग 66 शामिल हैं।
फरवरी माह में सरकारी हैचरी में आएगा बीज
विभाग के डिप्टी डायरेक्टर आत्माराम ने बताया कि उत्तर भारत में मछलियों को बढ़ावा देने के लिये यह कदम उठाया गया है। सब कुछ विभाग के अनुरूप रहा तो इनकी ब्रीडिंग भी यहीं पर करवाई जाएगी और जिले के मत्स्य पालकों को सस्ती दरों पर बीज उपलब्ध करवाया जाएगा। ये पांचों प्रजातियों के मार्केट रेट अच्छे हैं। इनके पालन के लिए किसानों को तैयार किया जा रहा है। आत्माराम ने बताया कि ये पांचों प्रजातियों का उत्पादन काफी महंगा है, लेकिन अब धीरे धीरे इनके मार्केट तैयार हो रही है। इसलिए अब इन प्रजातियों पर जोर दिया जा रहा है। इनका बीज बाहर से मंगवाया जाता है। साथ ही इनका रेट 400 से 600 रुपये प्रति किलोग्राम तक होता है।
मत्स्य पालक कर सकते हैं अच्छी आमदनी : एसीएस
मत्स्य विभाग के एडिशन चीफ सेक्रेटरी सुनील कुमार गुलाटी का कहना है कि प्रदेश के मछली पालक रोहू, कतला, मृगल का पालन तो करना सीख गए हैं। अब उनसे हाई वैल्यू फिश पंगास, देशी मांगूर, जयंती रोहू, सिंघी और अमूर कार्प का पालन करवाया जाएगा। इससे मछली पालक अच्छी आमदनी प्राप्त कर सकते हैं। इनको बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।