पानीपत। रोडवेज डिपो पानीपत ने शनिवार को फर्स्ट एड दिवस मनाया। जिले में कार्यरत प्रशासनिक अधिकारी, सामाजिक संस्थाओं से जुड़े लोगों ने हादसा होते ही घायल को प्राथमिक उपचार देने के लिए जागरूक किया, लेकिन हकीकत ये है कि सरकारी विभाग ही फर्स्ट एड किट को वाहन में रखना जरूरी नहीं समझते। इस संबंध में शुक्रवार को पुराने बस अड्डे में बूथ पर खड़ी 15 के करीब बसों की पड़ताल की गई तो अधिकतर बसों में फर्स्ट एड किट नहीं मिली। कई में किट तो लगी थी, लेकिन उसमें किसी प्रकार की दवा नहीं थी।
इस संबंध में परिचालकों ने बताया कि एक बार किट में रखा सामान एक्सपायर होने के बाद उन्हें दोबारा कभी पूरी दवा या पट्टी इत्यादि नहीं मिले हैं। कुछ बसों में तो एक पॉलिथीन में पट्टी और दवा मिली। ट्यूब और दर्द निवारक दवाएं बस में मौजूद ही नहीं थी। ये हालात तब हैं, जब हर साल कागजों पर फर्स्ट एड किट के नाम पर हजारों रुपए के बिल पास हो रहे हैं।
बॉक्स
फर्स्ट एड किट के इस्तेमाल की नहीं होती जानकारी
सड़क हादसों में सबसे ज्यादा चोट दुपहिया चालक को ही लगती है। कई बार राहगीर लहुलूहान हालत में दुपहिया वाहन चालक को तड़पता छोड़ देते है। मददगार भी चोटिल चालक को उठाकर तुरंत अस्पताल पहुंचाते हैं, लेकिन बाइक के टूल बॉक्स में पड़ी फर्स्ट एड किट कैसे इस्तेमाल होती है, इसकी उन्हें कोई जानकारी ही नहीं होती। नतीजन अस्पताल पहुंचने तक चोटिल चालक का खून बहता रहता है। अगर मददगार को फर्स्ट एड किट के इस्तेमाल की जानकारी हो तो घायल के बहते खून को घटनास्थल पर ही रोका जा सकता है।
वर्जन
बसों में किट नहीं होने पर जिम्मेदारों के खिलाफ होगी कार्रवाई
बसों में फर्स्ट एड किट होना सबसे अधिक जरूरी है। हादसा होने की स्थिति में घायल को प्राथमिक उपचार देना परिचालक की जिम्मेदारी है। अगर बसों में किट नहीं है, तो इसकी जांच कराई जाएगी। जिस बस में किट नहीं होगी, उसके परिचालक से कारण पूछ कर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
कुलदीप जांगड़ा, महाप्रबंधक रोडवेज डिपो पानीपत