संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। मेरठ रोड स्थित सूरज नगर के एक मकान में रखे अवैध पटाखों में मंगलवार सुबह धमाका हो गया। मकान की छत उड़ गई और तीन दीवार ढह गईं। मकान के बाहर गली में खेल रही 10 वर्षीय बच्ची देविका घायल हो गई। साथ लगते चैनराज के मकान में दरार आ गई। ढाई माह पहले इन अवैध पटाखों को सील किया गया था। ढाई माह से अधिक गुजर गए, इन्हें नष्ट नहीं किया गया था। अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा आम लोगों ने भुगता।
अवैध पटाखों को जब्त किए जाने के बाद इनको नष्ट करने की कार्रवाई की जाती है। इसके लिए पुलिस, दमकल विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कमेटी बनाई जाती है। सूरज नगर में सील किए गए पटाखों को नष्ट करने के लिए कमेटी ढाई माह बाद भी नहीं बन सकी।
माना जा रहा है कि तेज धूप और गर्मी के कारण पटाखों में धमाका हुआ। धमाके के बाद लोगों ने दमकल विभाग की गाड़ी को सूचना दी। दमकलकर्मियों ने आग पर काबू पा लिया लेकिन सात घंटे बाद तक टूटे घर के मलबे के नीचे दबे पटाखों में धमाके होते रहे।
सूरज नगर निवासी चैन राज ने बताया कि मंगलवार सुबह उनकी बेटी देविका बाहर गली में खेल रही थी। इसी दाैरान तेज धमाका हुआ। बाहर निकलकर देखा तो साथ वाले मकान की छत उड़ गई थी। तीन ओर की दीवारें भी ढह गई थीं। उनकी बच्ची हादसे में घायल हुई है। सेक्टर 32,33 थाना प्रभारी सतीश कुमार ने बताया कि पुलिस मामले की जांच कर रही है।
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मालिक के खिलाफ दर्ज हो चुकी प्राथमिकी
सेक्टर 32,33 थाना पुलिस ने पटाखा बनाने वाले विजय नगर निवासी आरोपी राजकुमार के खिलाफ बिना परमिट वा लाइसेंस के पटाखे बनाने पर 9बी एक्सप्लोसिव अधिनियम 1884 व बीएनएस की धारा 288 और 125 के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। उसे गिरफ्तार किया था। इसके बाद वह जमानत पर छूट गया।
सूरज नगर निवासी महिला राकेश ने बताया कि उन्होंने कई बार मकान मालिक को चेतावनी दी थी कि यहां पटाखे रखना खतरनाक है लेकिन उसने कोई ध्यान नहीं दिया। उन्होंने बताया कि हाल ही में ऋण लेकर मकान बनाया था। धमाके से दीवार में दरार आ गई। उन्होंने मुआवजे की मांग की है।
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जनवरी में किया था सील24 जनवरी, 2026 को पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर दबिश दी थी। मकान से भारी मात्रा में पटाखे और बारूद बरामद हुआ था। पुलिस ने पटाखों से भरी वाहन को कब्जे में ले लिया था। पुलिस ने मौके पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सूचना दी गई थी। बोर्ड से जेई राहुल और दिनेश शर्मा मौके पर पहुंचकर नमूने लिए थे। करीब 100 पेटी पटाखे मकान के अंदर सील कर छोड़ दिया था।
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एक-दूसरे पर टाल रहे जिम्मेदारी
सभी विभागों का कहना है कि उन्होंने अपना काम किया। पुलिस मानती है कि उनका काम मामला दर्ज करना, आरोपी को पकड़ जेल भेजना था। वो पुलिस ने किया। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कहना है कि उनका काम सील करना था। उन्होंने सील कर दिया। दमकल विभाग का कहना है कि डिस्पाॅज ऑफ के लिए कमेटी बननी थी जो अब तक नहीं बनी। ऐसे में नष्ट कैसे करते।
प्रदूषण नियंत्रक बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी कंवलजीत का कहना है कि बोर्ड का काम सिर्फ सील करना होता है। नष्ट करने की जिम्मेदारी फायर एंड सेफ्टी ऑफिसर की होती है। विभाग की ओर से फॉयर सेफ्टी वालों को पत्राचार करना होता है, जो किया गया था।
जिला दमकल अधिकारी दीपक शर्मा ने बताया कि इस प्रकार के मामलों में पटाखों को नष्ट करने के लिए पुलिस, प्रदूषण नियंत्रक बोर्ड और दमकल विभाग की एक कमेटी बनती है। इसके बाद डीसी नष्ट करने की तारीख तय करते हैं। अभी तक इस मामले की कमेटी ही नहीं बनी है।
थाना सेक्टर 32 प्रभारी सतीश कुमार बोले कि पुलिस ने अवैध रूप से पटाखे मिलने पर एक्सलोसिव एक्ट और बीएनएस की धाराओं के तहत आरोपी राजकुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मौके पर पटाखे सील कर दिए थे। आगे की कार्रवाई भी उनकी ओर से की जानी थी।
ब्लास्ट के बाद क्षतिग्रस्त मकान। संवाद