सीएसएसआरआई करनाल के रिटायर्ड प्रिंसिपल साइंटिस्ट को राज्यपाल का ओएसडी
लगवाने के नाम पर डेढ़ करोड़ रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है
कि राज्यपाल से नजदीकियाें का हवाला देकर उन्हें सब्जबाग दिखाए और पैसे ऐंठ
लिए। इस मामले की शिकायत आईजी बलबीर सिंह को की गई, जिसके बाद मामला
इकोनॉमिक सेल को जांच का जिम्मा सौंपा गया है।
सीएसएसआरआई के रिटायर्ड
प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ. ज्ञान प्रकाश भार्गव ने बताया कि वर्ष 2013 में
मनु लाठर निवासी बजीदा जाटान उनके बेटे रोहित भार्गव के पास आईईएलटीएस की
कोचिंग करने आया था। बातों-बातों में उसने राज्यपाल से अपनी पहुंच के बारे
में बताना शुरू कर दिया। उसने रोहित भार्गव को उसके रिटायर्ड पिता को
राज्यपाल का ओएसडी लगवाने की बात कही।
अपने पिता को इतने बड़े पद पर लगवाने
की बात पर रोहित उनकी बातों में आ गया। आरोप है कि मनु एक साजिश के तहत यह
सब कर रहा था और इसमें कई लोग शामिल थे, जिनसे उसने रोहित की बात भी
करवाई। एक साल तक यह सिलसिला चला और इस दौरान उसने करीब डेढ़ करोड़ रुपये
उनसे ठग लिए।
ज्ञान प्रकाश भार्गव ने बताया कि उन्होंने अपने शैक्षणिक
प्रमाणपत्र आरोपी को दिए और उसने जल्द से जल्द नियुक्ति की बात की। भार्गव
नेे एसपी को दी शिकायत की प्रति दिखाते हुए कहा कि जिन सात आरोपियों ने ठगी
की है, उनमें से ज्यादातर पुलिस एकेडमी मधुबन के रहने वाले हैं।
इसलिए ठगी
में पुलिसकर्मियों के शामिल होने का भी अंदेशा है। फाइट फार जस्टिस क्लब
ऑफ इंडिया के चेयरमैन एडवोकेट हरीश आर्य ने बताया कि शिकायत में विक्रम
धनोवा और विशाल धनोवा निवासी कसेरकलां अंबाला, ज्ञानेंद्र सिंह दहिया,
सोनिया दहिया और विशाल दहिया निवासी एचएपी मधुबन, अनुज सिंह निवासी एचएपी
मधुबन पर भी आरोप हैं। शिकायत में कहा गया है कि राज्यपाल के नाम से ठगी
करने वाले मनु लाठर ने अपने साले विक्रम के साथ मिलकर एक गिरोह चलाया है,
जो लोगों को ठगने का काम करता है।
बातचीत की सीडी बनाई
भार्गव
ने बताया कि जब उन्हें पूरे मामले में शक हुआ तो उन्होंने आरोपियों से
बातचीत की सीडी बना ली, जिसमें वे राज्यपाल के नाम पर पैसे मांग रहे हैं।
भार्गव ने कहा कि उन्होंने अपना मकान, शेयर, पत्नी के जेवर सब कुछ गिरवी
रखकर डेढ़ करोड़ रुपया जमा किया था। उनकी जीवन भर की पूंजी खत्म हो गई।