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Karnal News: किसानों को जल्द मिलेगी आलू की प्रजाति ‘चिप्सोना-05’ की सौगात

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डॉ.देवेंद्र कुमार, निदेशक सीपीआरआई शिमला
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देव शर्मा
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करनाल। चिप्स खाने के शौकीनों और आलू उत्पादकों को आगामी कुछ समय में ‘चिप्सोना-05’ प्रजाति का आलू मिल जाएगा। साथ ही अधिक गर्मी वाले इलाकों में बेहतर उत्पादन के लिए कुफरी भास्कर और कम पानी वाले क्षेत्रों के लिए कुफरी दक्ष प्रजाति रिलीज होने की तैयारी में हैं। आलू उद्योग को बढ़ावा देने, डायबिटीज से प्रभावित लोगों की पसंद बनाने, इनके तैयार होने का समय कम करने और इनका उत्पादन बढ़ाने के लिए उक्त प्रजातियों पर केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान शिमला में शोध चल रहा है। इनमें चिप्सोना-05 रिलीज होने के लिए तैयार है।
करनाल स्थित आलू प्रौद्योगिकी केंद्र शामगढ़ में आयोजित दो दिवसीय द्वितीय आलू कॉन्क्लेव में पहुंचे केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (सीपीआरआई) शिमला के निदेशक डॉ. देवेंद्र कुमार ने बताया कि उनके संस्थान ने ही 1998 में चिप्सोना प्रजाति तैयार कर रिलीज की थी। इसके बाद चिप्सोना-01, 02, 03 और चिप्सोना 04 प्रजातियां रिलीज की गई, लेकिन महसूस किया गया कि ये प्रजातियां तैयार होने में 100 से 110 दिन तक लेती हैं। समय लंबा लगने के कारण कभी-कभी किसान इन्हें लगाने से हिचकिचाते हैं, क्योंकि अन्य फसलों की बुआई भी करनी होती है।
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इस कारण अब चिप्सोना-05 पर शोध किया गया है, जिसके तैयार होने की अवधि अधिकतम 90 दिन किया गया है, लेकिन गुणवत्ता ज्यों की त्यों रहेगी। सीपीआरसी के पूर्व निदेशक डॉ. एसके पांडेय ने बताया कि उनके समय में ही चिप्सोना-01 को रिलीज किया गया था। आलू उत्पादन के लिए रात का तापमान 10 से 18 डिग्री सेल्सियस उत्तम होता है। आलू में पानी की मात्रा घटाई और शुष्क पदार्थ बढ़ाया जा रहा है, ताकि वह अधिकाधिक बेहतर उत्पाद रिकवरी के साथ औद्योगिक उपयोग में आ सके। 20 सालों में आलू की पैदावार बढ़ी है, अब इसे 2030 तक 25-26 टन से 30 से 35 टन प्रति हेक्टेयर पैदावार तक करने का लक्ष्य है।
गर्म इलाकों में पैदा होगा कुफरी भास्कर
निदेशक ने बताया कि जनसंख्या के साथ ही आलू की खपत भी बढ़ रही है। ऐसे में अधिक क्षेत्रों में उत्पादन आवश्यक है, लेकिन देश में कई ऐसे गर्म क्षेत्र हैं, जहां आलू की पैदावार कम हो पा रही है। ऐसे क्षेत्रों के लिए कुफरी-सूर्या व कुफरी-किरण के बाद अब कुफरी भास्कर प्रजाति पर कार्य किया गया है। ये अगैती प्रजाति है, जो एक माह पहले यानी 15 सितंबर के आसपास लगाई जाएगी और नवंबर में खोदाई हो जाएगी। दिवाली से पहले नए आलू का अच्छा भाव होता है। कर्नाटक, महाराष्ट्र, आध्रप्रदेश, तेलंगाना आदि कई गर्म इलाकों के लिए यह बेहद उपयोगी साबित होगी। इसका उत्पादन औसतन 70 दिन में 125 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होगा, लेकिन ये गर्मी रोधी प्रजाति होगी।
कुफरी दक्ष
निदेशक डॉ. देवेंद्र कुमार ने बताया कि कम पानी में उत्पादन समय की आवश्यकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए संस्थान कुफरी दक्ष को रिलीज करने जा रहा है, जिसमें 20 प्रतिशत पानी की बचत होगी और उसका उत्पादन 320 से 350 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होगा। राजस्थान, महाराष्ट्र आदि कई इलाके ऐसे हैं, जहां पानी की किल्लत है, वहां के लिए ये प्रजाति बेहतर होगी।
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चिप्सोना-01 प्रजाति को इस वर्ष 25 साल पूरे हो गए हैं। इस प्रजाति ने आलू के औद्योगिकीकरण में बड़ी छलांग लगाई है, इसलिए 2023 को सिल्वर जुबली वर्ष मनाया जा रहा है। सीपीआरआई में इसके लिए विशेष समारोह की तैयारी की जा रही है।
- डॉ. देवेंद्र कुमार, निदेशक, केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला (फोटो-1002)
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