कैथल में अब किसानों को कीट एवं खरपतवार नाशक दवाओं के विक्रेताओं की मनमर्जी का शिकार नहीं होना पड़ेगा। उन्हें अपने प्रतिष्ठान के माध्यम से बेची जा रही दवाओं के लिए निर्माता कंपनी से प्रिंसिपल प्रमाण पत्र लेकर कृषि विभाग से मिलने वाले लाइसेंस के आवेदन पत्र के साथ लगाना होगा। तभी उन्हें लाइसेंस मिल सकेगा।
इस प्रिंसिपल प्रमाणपत्र में उन सभी दवाओं का ब्योरा एवं बनाए जाने संबंधी जानकारी होगी, जो दुकानदार द्वारा बेची जाएंगी। यदि दुकान में इससे दूसरी दवाएं मिलीं तो कृषि विभाग के अधिकारी कार्रवाई कर सकेेंगे।
अक्सर भोले-भाले किसान दवाओं में खरपतवार नाशक एवं कीटनाशकों की खरीद में धोखे का शिकार हो जाते हैं। उन्हें अच्छी पैकिंग में वह सामग्री थमा दी जाती है, जिसका खरपतवार एवं कीटों पर कोई असर नहीं होता। जबकि इसके लिए उन्हें हजारों रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
ऐसे में अक्सर नकली कीटनाशकों की बिक्री की शिकायतें विभाग को मिलती रहती हैं। पूर्व में कंपनियों की ओर से अपनी दवाओं के विक्रेता दुकानदारों के लिए प्रिंसिपल प्रमाण पत्र जारी किया जाना अनिवार्य होता था, लेकिन कुछ समय पूर्व उच्च न्यायालय ने इस संबंध में स्थगनादेश जारी कर दिया गया था।
अब इस स्थगनादेश को गुजरात हाईकोर्ट ने रोक हटा ली है। जिस कारण अब एक बार फिर से दुकानदार के लिए प्रिंसिपल प्रमाण पत्र हासिल करना जरूरी हो गया है। इस संबंध में कृषि विभाग ने सभी जिला कृषि उप-निदेशकों को आदेश जारी कर दिए गए हैं। आदेशों में अगले तीन माह में प्रत्येक कीटनाशक एवं खरपतवार नाशकों से यह प्रमाण पत्र हर हाल में जमा करवाने के लिए कहा गया है।
नकली दवाओं पर अंकुश लगेगा
कृषि उप-निदेशक डा. पवन शर्मा ने बताया कि विभागीय आदेश प्राप्त हुए हैं। जिसके अनुसार अब खरपतवार एवं कीटनाशक विक्रेता जिस कंपनी की दवा बेच रहे हैं। उस कंपनी से दवा बेचने संबंधी प्रिंसिपल प्रमाण पत्र लेकर कृषि विभाग से मिलने वाले लाइसेंस के आवेदन के साथ जमा करवाना होगा।
इस प्रमाण पत्र में कंपनी की ओर से दुकानदार को दवा बिक्री की अनुमति के अलावा बेची जाने वाली दवाओं की पूरी जानकारी उपलब्ध होती है। इससे जहां नकली दवाओं की बिक्री पर अंकुश लगेगा। वहीं विभागीय जांच भी आसान हो जाएगी। दुकानदार के पास बिना कंपनी की अनुमति का माल पाया जाता है तो कार्रवाई की जा सकेगी। इसके लिए सभी दुकानदारों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। अगले तीन माह में प्रिंसिपल प्रमाणपत्र जारी करवाना अनिवार्य है।