फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Karnal News: धान घोटाले के खिलाफ भड़के किसान, किया प्रदर्शन

विज्ञापन
धान घोटाले के खिलाफ भड़के किसान, किया प्रदर्शन
विज्ञापन
माई सिटी रिपोर्टर
विज्ञापन

करनाल। करोड़ों रुपये के धान घोटाले में पुलिस के साथ-साथ मार्केटिंग बोर्ड, खाद्य आपूर्ति जैसे विभाग आरोपियों पर कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं। जांच आगे नहीं बढ़ रही है। जिसे काली जांच बताते हुए वीरवार को भारतीय किसान यूनियन से जुड़े किसानों ने काले कपड़े पहनकर विरोध प्रदर्शन किया। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे प्रदेशाध्यक्ष रतनमान ने खाद्य आपूर्ति विभाग से एसीएस का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने घोटालों के आरोपी अधिकारियों को ही जांच का जिम्मा सौंप दिया है, जिससे सरकार की मंशा साफ दिख रही है। दोषियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कि निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई नहीं हुई तो ये आंदोलन प्रदेशभर में शुरू किया जाएगा।

वीरवार सुबह जाट धर्मशाला से किसान एकत्र हुए। यहां से प्रदेशाध्यक्ष रतनमान की अगुवाई में किसान काले कपड़े और काले बिल्ले लगाकर पैदल मार्च करते हुए लघु सचिवालय पहुंचे। यहां किसानों ने धान घोटाले की जांच में लापरवाही बरते जाने के खिलाफ प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। इसमें चेतावनी दी कि अगर धान घोटाले की पारदर्शी जांच नहीं हुई तो राज्यव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा।
विज्ञापन

इस दौरान रतन मान ने प्रशासन और सरकार पर काली जांच के नाम पर सच्चाई दबाने का आरोप लगाया। उन्होंने खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के एसीएस डी. सुरेश पर भी भ्रष्टाचार के मामलों में संलिप्त अधिकारियों को बचाने का आरोप लगाया। उन्होंने मांग की कि धान घोटाले की उच्च स्तरीय जांच की जाए और दोषी अधिकारियों को तुरंत निलंबित कर जेल भेजा जाए।
भाकियू प्रदेश अध्यक्ष रतनमान ने कहा कि किसानों के खून-पसीने की कमाई पर कुछ अफसर, बिचौलिए और राजनीतिक लोग डाका डाल रहे हैं। अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो किसान सड़कों पर उतरकर प्रदेश को जगा देंगे। किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार ऐसे अधिकारियों को संरक्षण देकर घोटालों की जड़ को और मजबूत कर रही है। यह संघर्ष सिर्फ एक जांच तक सीमित नहीं रहेगा यह किसानों की इज्जत, मेहनत और अधिकारों की लड़ाई है।
विज्ञापन

जब पैदावार में 30 प्रतिशत कमी तो खरीद ज्यादा कैसे
भाकियू ने ज्ञापन में धान घोटाले का आरोप लगाते हुए आंकड़े भी दिए हैं। कहा गया कि विभाग की रिपोर्ट में साफ वर्ष 2025 में प्राकृतिक कारणों से धान की पैदावार में 25 से 30 प्रतिशत की कमी आई। ऐसे में धान की अपेक्षित आमद 40 लाख 50 हजार मीट्रिक टन रहनी चाहिए थी, जबकि 18 लाख 22 हजार मीट्रिक टन अधिक है, जोकि फर्जी बढ़ोतरी दिखा दी गई है, जो मंडियों में फर्जी गेट पास काटकर की गई है। इस फर्जीवाड़े की कीमत 2389 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से करीब 4 हजार करोड़ रुपये बैठती है। सरकार ने वर्ष 2025 में धान खरीद के लिए 10 हजार करोड़ रुपये का बजट रखा था लेकिन फर्जीवाड़े के कारण अब तक यह राशि 14 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो चुकी है। इसका सीधा अर्थ है कि 4 से 5 हजार करोड़ रुपये के फर्जी गेट पास काटे गए हैं और सरकार को अरबों रुपये का चूना लगाया गया है। मिलर्स और अधिकारियों की मिलीभगत से किसानों को एमएसपी से 200 से 300 रुपये प्रति क्विंटल कम भुगतान किया गया। इस तरह किसानों से दोहरी लूट की गई।
-


भाकियू की मुख्य मांगें-
- धान घोटाले की जांच हाईकोर्ट के सिटिंग जज से कराई जाए।
- आईएएस डी. सुरेश सहित जिम्मेदार अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जाए।
- किसानों को दिए गए एमएसपी से कम भुगतान का अंतर तुरंत चुकाया जाए।
- भ्रष्टाचार में लिप्त मिलर्स और मंडी अधिकारियों के लाइसेंस रद्द किए जाएं।
- छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाना छोड़ मुख्य दोषियों को सजा दी जाए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें