इंद्री। किनारे के गांवों के लोगों की कृषि योग्य जमीनें यमुना में समा गई हैं। धारा बदलने से कई किसानों की जमीन का हिस्सा दूसरे किनारे पर पहुंच गया है। अब उन्हें अपनी फसलों के लिए यमुना पार जाना पड़ेगा। गांव कलसौरा वासी प्रवीन ने बताया कि यमुना से आया पानी काफी हद तक उतर चुका है लेकिन खेतों में पानी भरा हुआ है। पानी के कारण उनकी फसल खराब हो गई है।
दोहरी मार : डेढ़ एकड़ जमीन यमुना में गई, चार एकड़ फसल बर्बाद
किसान सतपाल ने बताया कि यमुना की धारा के घूमने के कारण उनकी दस एकड़ कृषि भूमि यमुना नदी के पार चली गई है। यह भूमि आती तो हरियाणा में है लेकिन बुवाई के लिए यमुना पार जाना पड़ेगा। कटाव के कारण करीब डेढ़ एकड़ भूमि यमुना में चली गई है। उन्होंने छह एकड़ में गन्ना और चार एकड़ में धान की फसल बोई थी। गन्ने का तो फिर भी बचाव हो सकता है पर धान की फसल खत्म हो गई है
नदी में समाई आठ एकड़ फसल कलसौरा गांव निवासी किसान रामपाल ने बताया कि उनकी बहत्तर एकड़ कृषि भूमि यमुना पार चली गई है। कटाव के कारण आठ एकड़ जमीन फसल के साथ यमुना नदी में समा गई है। यमुना उफान पर होने के कारण वह अपने खेतों में नहीं जा पा रहे हैं। उनका काफी सामान और कृषि यंत्र खेतों में ही पड़े हुए हैं। उन्होंने अपने खेतों में हजारों रुपये खर्च कर के सोलर पैनल लगवाया था। किसी ने उन्हें फोन पर सूचना दी है कि उनका सोलर पैनल भी यमुना में बहने वाला है।
42...इंद्री किसान सतपाल। संवाद