- खोदाई के बाद हर साल 20 से 30 प्रतिशत लहसुन की फसल हो जाती है खराब
- खेत से निकलने के बाद सस्योत्तर प्रक्रियाओं की जानकारी न होने से किसानों को होता है बड़ा नुकसान
देव शर्मा
करनाल। लहसुन की फसल खेतों में लहलहा रही है, जिसकी खोदाई का समय 25 मार्च से शुरू होकर करीब 15 अप्रैल तक रहेगा। अब तक देखा गया है कि तैयार फसल का खोदाई के बाद सस्योत्तर तकनीक की जानकारी न होने के कारण करीब 20 से 30 प्रतिशत फसल खराब हो जाती है, जिससे किसानों को बड़ा नुकसान पहुंचता है। इसके लिए किसानों को खोदाई के बाद की प्रक्रियाओं व भंडारण की सही तकनीक की जानकारी होने चाहिए। जिससे वह नुकसान को कम कर सकते हैं।
राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (एनएचआरडीएफ) के क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र सलारू (करनाल) के अध्यक्ष एवं सहायक निदेशक (बागवानी) डॉ.आलोक कुमार सिंह ने किसानों को लहसुन खुदाई के उपरांत की जाने वाली विभिन्न प्रक्रियाओं (सस्योत्तर तकनीकी) की जानकारी दी। उनका कहना है कि लहसुन हर घर की रोजमर्रा की जरूरत है, ये औषधीय गुणों से भी भरपूर है, इसकी पैदावार हरियाणा सहित देश के विभिन्न राज्यों में होती है। इसकी बेहतर पैदावार और भंडारण के लिए किसानों को सस्योत्तर तकनीकियों की जानकारी का होना भी नितांत आवश्यक है। लहसुन की खुदाई के बाद सुखाना और पकाना अति आवश्यक है। जिससे खेत की गर्मी व कंदो की अतिरिक्त नमी निकल जाती है। कंदो का रंग भी निखरता है, भंडारण क्षमता भी बढ़ जाती है। सुखाने के लिए 6-7 दिनों तक खेत में विंड रो क्योरिंग पद्धति से सुखाएं, इसमें एक पंक्ति के कंदो को दूसरी पंक्ति की पत्तियों से ढकते हैं। लहसुन के कंद की गर्दन 2-2.5 सेमी. ऊपर से काटें। काटने के बाद 4-5 दिनों तक छायादार एवं हवादार स्थान पर रखकर सुखाएं। कंद अच्छी प्रकार सूख जाए तो गर्दन पतली व मुंह बंद हो जाएगा। जिससे जीवाणु या विषाणु प्रवेश नहीं कर पाएंगे। अच्छी तरह सूखे हुए कंदो में से कटे फटे, सड़े-गले, मोटी गर्दन वाले, रोगी तथा छोटे कंदो की छंटाई करके अलग कर दें। लहसुन के कंदो का दो तीन आकार में श्रेणीकरण करें, ताकि बाजार भाव भी अच्छा मिले। लहसुन की बिक्री के लिए बाजार में ले जाने के लिए जूट की बोरियों का इस्तेमाल करें। इससे कंदो को हानि नहीं होगी।
ऐसे करें लहसुन का भंडारण-
- अच्छी प्रकार से सूखे हुए लहसुन की पत्तियों सहित छोटे-छोटे गट्ठर बनाकर लटकाएं या नीचे ही फर्श पर रखें।
- व्यवसायिक भंडारण के लिए लहसुन कंदो की पत्तियों काटकर नाइलोन या जूट की बोरियों में भरकर भंडारण करें।
- छह से आठ माह तक किसी भी तापमान पर भंडारित किया जा सकता है, तापमान नियंत्रण की जरूरत नहीं है।
- भंडारण के समय अंकुरण को रोकने के लिए कोवाल्ट 60 गामा किरणों उपचारित किया जा सकता है।
- लहसुन को खुदाई के 45-50 दिनों के अंदर ही उपचारित करना उचित रहता है।
- खुदाई के 15-20 दिन पूर्व सीआईपीसी. या मेलिक हाइड्राजाइड नामक दवाई का 3000 पीपीएम का स्प्रे करें।
- फसल की खुदाई से 15 दिन पूर्व 0.1 प्रतिशत वाविस्टिन का स्प्रे करें, चाकि रोग न लगें।
अधिक भंडारण क्षमता वाली प्रजातियों का करें चयन
लहसुन की फसल में खोदाई के बाद करीब 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा खराब हो जाता है, जो किसानों को सीधा नुकसान होता है, इसकी वजह किसानों को सस्योत्तर प्रक्रियाओं की जानकारी न होना है। पहले तो किसानों को अच्छी भंडारण क्षमता वाली लहसुन की प्रजातियों जैसे जी-1, जी-41, जी-50, जी-282, जी-384, जी-386 व जी-323 आदि का चयन करना चाहिए। इन प्रजातियों में नुकसान कम होता है।
- डॉ. आलोक कुमार सिंह, अध्यक्ष, एनएचआरडीएफ क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र सलारू (करनाल)।