उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम उपभोक्ताओं के शोषण का केंद्र बनता जा रहा है। खंभे हटाना हो, मीटर बदलवाना या फिर गलत बिजली बिल का सेटलमेंट कराना, सभी काम में महीनों लग जाते हैं। सबसे ज्यादा परेशानी गलत बिजली बिल से है। एक दो माह का बिल भी उपभोक्ताओं को हजारों लाखों में भेजा जा रहा है। जब उपभोक्ता इसकी शिकायत लेकर निगम ऑफिस पहुंचते हैं तो उन्हें सेटलमेंट करने को कहा जाता है या फिर वे निगम दफ्तर के चक्कर ही लगाते रहते हैं। वहीं, निगम अधिकारी दावा करते हैं कि यहां पर उपभोक्ताओं को कोई समस्या नहीं है। अधिकारियों के इन दावों पर मंगलवार को अमर उजाला की टीम ने निगम ऑफिस का रियलिटी चेक किया।
दरअसल, निगम दफ्तर में सोमवार को उपभोक्ताओं की समस्या सुनने के लिए उपभोक्ता कष्ट निवारण समिति ने खुला दरबार लगाया था। करीब एक घंटे चले इस खुले दरबार में मात्र दो उपभोक्ता शिकायत लेकर पहुंचे थे। जब खुले दरबार की जानकारी लोगों तक न पहुंचाने की बात कहते हुए अधिकारियों से कम शिकायत आने का कारण जानना चाहा तो अधिकारियों ने दावा किया था कि यहां पर उपभोक्ताओं को कोई समस्या नहीं है, इसलिए लोग खुले दरबार में शिकायत लेकर नहीं आ रहे हैं। अधिकारियों के इन दावों की सच्चाई जानने के लिए मंगलवार को अमर उजाला की टीम ने निगम दफ्तर पहुंचकर सच्चाई जानने की कोशिश की। करीब एक घंटे के दौरान निगम ऑफिस में 50 से अधिक उपभोक्ता शिकायत लेकर पहुंचे। ज्यादातर उपभोक्ताओं की शिकायत गलत बिजली बिल, मीटर खराब होना, नया कनेक्शन लेने और पोल हटाने या लगाने से संबंधित थी।
शिकायत करने से डरते हैं उपभोक्ता
बिजली निगम में शिकायत लेकर आने वाले उपभोक्ता समस्या का निदान तो चाहते हैं, लेकिन इसको मीडिया को बताना में डरते हैं। शहर के एक उपभोक्ता के दो माह का बिजली बिल तीन लाख रुपये आया था। उपभोक्ता ने बताया कि बिल सही कराने के लिए एक माह से निगम दफ्तर का चक्कर लगा रहा है। अधिकारी आज कल में कहकर लौटा देते हैं। इस बारे में जब संवाददाता ने शिकायत मीडिया को देने की बात कही तो उपभोक्ता ने कहा कि यदि तस्वीर अखबार में छप गया तो अधिकारी खुन्नस में बिजली बिल नहीं सही करेंगे।
इसी तरह कृष्णा नगर के उपभोक्ता का बिजली बिल 495 यूनिट था, लेकिन निगम की ओर से 4,495 यूनिट का बिल भेजा गया। उपभोक्ता ने कहा कि गलत बिल की शिकायत एसडीओ, एक्सईएन और एसी सभी अधिकारियों को की, लेकिन दो माह हो गए समस्या का निदान नहीं हुआ। इस उपभोक्ता ने भी अधिकारियों के डर से अपना नाम बताने से इनकार कर दिया। इसी तरह दर्जनों और उपभोक्ता थे जो निगम के शोषण का शिकार थे, लेकिन मीडिया को अपना नाम नहीं बताना चाहते थे।
जुर्माना भरने पर भी लग रहा जुर्माना
गांव सीकरी के सरपंच पति बलबीर मराठा ने बताया कि गांव के पास स्थित डेरा पर चार माह पूर्व कुछ लोगों को बिजली चोरी के आरोप में पकड़ा गया था। लोगों ने निगम को जुर्माना के साथ सभी बिल अदा कर दिया, लेकिन इसके बाद भी हर बार बिजली बिल में जुर्माना जोड़ कर भेजा जाता है। इस समस्या को कई बार एक्सईएन सहित अन्य अधिकारी को बता कर बिल से जुर्माना हटवाने की मांग की गई है, लेकिन समस्या का कोई समाधान नहीं हो रहा। चार माह से निगम दफ्तर के धक्के खा रहे हैं।
बार-बार गलत बिल से परेशान
गांव चिड़ाव निवासी संजीव नरवाल भी बार-बार भेजे जाने वाले गलत बिजली बिल से परेशान हैं। संजीव ने कहा कि दो तीन माह में एक बार जरूर गलत बिजली बिल भेजा जाता है। इसकी शिकायत कई बार निगम अधिकारियों को की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होता। इस बार भी निगम ने दो माह का बिल एक हजार यूनिट अधिक जोड़ कर भेजा दिया। इसको सही करवाने के लिए फिर से अधिकारियों का चक्कर लगा रहा हूं। इस बार चार दिन से लगातार यहां आ रहा हूं, लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई।
पोल हटाने के लिए तीन माह से लगा रहे चक्कर
गांव शाहपुर निवासी शिवकुमार खेतों में लगे ट्यूब्येल को एक जगह से दूसरी लगाना चाहते हैं, इसके लिए वे पोल को दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिए नवंबर माह में ही निगम अधिकारियों को प्रार्थनापत्र दे चुके हैं। शिवकुमार ने बताया कि, प्रार्थनापत्र देने के साथ सभी जरूरी कागजात भी जमा कर दिया है, लेकिन अभी तक पोल शिफ्ट नहीं हुआ। शिवकुमार ने कहा कि वह तीन माह से निगम दफ्तर का चक्कर लगा रहा है, कभी एसडीओ के पास भेजा जाता है तो कभी एक्सईएन के पास। यहां पर उपभोक्ताओं की समस्या सुनने वाला कोई नहीं है।
लाइन हटाना है, लेकिन नहीं हो रही सुनवाई
बंसत विहार के गुलाब सिंह पोसवाल घर के ऊपर से जा रही 33 केवी हाईटेंशन लाइन को हटवाना चाहते हैं, इसके लिए वे करीब छह माह से निगम के चक्कर लगा रहे हैं। गुलाब सिंह ने बताया कि यह हाईटेंशन लाइन कॉलोनी के लगभग सभी घरों के ऊपर से जा रही है। इससे यहां पर कई हादसे भी हो चुके हैं। कॉलोनी के लोग हाईटेंशन की वजह से घरों की छतों पर भी नहीं जाते। इस लाइन को हटाने के लिए करीब छह माह से निगम दफ्तर के चक्कर लगा रहे हैं। तीन माह से अधिकारी सिर्फ एस्टीमेट तैयार करने की बात कह एक जगह से दूसरी जगह चक्कर लगवा रहे हैं।