कैथल। अच्छी कमाई के लालच में युवा लाखों रुपये गंवाने के साथ जान की भी जोखिम में डाल रहे हैं। ऐसा की एक और मामला सीवन के गांव कांगथली में आया है। इस मामले में 19 वर्षीय मनप्रीत लीबिया में करीब 10 महीने से डॉन्करों की कैद में फंसा था। वह शनिवार को दोपहर कांगथली गांव पहुंचा है। मनप्रीत ने बताया वहां काफी यातनाएं झेलीं। खाना भी एक बार मिलता था।
मनप्रीत सिंह ने बताया कि उसके पिता देंवेंद्र सिंह दिल मरीज हैं। वे दो भाई और एक बहन है। वह अपने भाई व बहनों में सबसे बड़ा है। गांव में कुछ एकड़ जमीन है। इससे ही परिवार का गुजारा होता है। अपने लिए कुछ करने और परिवार के लिए अच्छा पैसा कमाने की चाह में ही उसने जनवरी 2023 में विदेश जाने की योजना बनाई थी।
कुरुक्षेत्र के पिहोवा में बैठे एजेंट के साथ परिवार के सदस्यों का संपर्क हुआ। इसके बाद उनसे 13 लाख रुपये में इटली भिजवाने का सौदा तय हुआ। आश्वासन दिया कि वह उसे तेल की किसी कंपनी में नौकरी लगवा देंगे। वह इटली नहीं, लेकिन लीबिया में पहुंच गया। उसके साथ अन्य लोग भी थे।
लीबिया से पहले उन्हें दुबई भेजा गया। यहां भी वहां पर तैनात एजेंटों ने डॉन्करों के पास बेच दिया। इसके बाद वे रुपयों की और मांग करने लगे थे। बाद में तनिष्या नाम के देश में एबेंसी में कार्यरत अनिल कुमार से जब उसके व अन्य साथियों ने भारत सरकार के माध्यम से गुहार लगाई तो उन्होंने वहां से छुड़वाया।
मनप्रीत ने बताया कि वहां पर डोंकरों की तरफ से युवाओं के साथ जानवरों जैसा व्यवहार किया जाता था। केवल एक समय ही खाना देते थे। मनप्रीत ने कहा कि वहां पर अन्य कई युवा भी ऐसे ही एजेंटों की तरफ से बेच दिए जाते हैं। बाद में उन्हें घर वापस पहुंचने का कोई रास्ता भी नहीं मिलता है। मनप्रीत की मां सतबीर कौर ने कहा कि वे केंद्र सरकार का आभार जताती हैं। संवाद
कैलरम का साहिल भी लापता
कलायत के कैलरम गांव का निवासी साहिल भी करीब तीन माह से लीबिया में लापता है। उसका कोई भी सुराग नहीं लग रहा है। उसके परिजनों ने भी एजेंटों ने पुर्तगाल भेजने के नाम 12 लाख रुपये दिए थे। यह रुपये उसके पिता शिवकुमार ने अपनी एक एकड़ जमीन जमीन को गिरवी रखकर दिए थे। मामले में ग्रामीणों ने तीन दिन पहले ही हिसार-चंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर प्रदर्शन किया था। इसके बाद डीएसपी सज्जन कुमार ने उन्हें शांत करवाया था। ग्रामीणों ने पुलिस प्रशासन को मंगलवार तक का समय दिया था।