- प्रदेशभर में आठ सितंबर तक चलेगा राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिला नागरिक अस्पताल में मंगलवार को 39वां राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े का शुभारंभ किया। नेत्र रोग विशेषज्ञों ने मरीजों व उनके तीमारदारों को नेत्रदान के प्रति जागरूक किया गया। यह कार्यक्रम 25 से आठ सितंबर तक चलाया जाएगा। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. आशुतोष मित्तल ने बताया कि नेत्रदान करने वालों की संख्या बहुत कम है। नेत्रदान करने वाला व्यक्ति दो लोगों को रोशनी प्रदान कर सकता है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की आंखें किसी भी उम्र में दान की जा सकती हैं, भले ही आंखों में लैंस, चश्मा लगा हो या फिर आंख का ऑपरेशन हुआ हो।
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. नीतिका ने बताया कि वर्ष 2024 में मेरे बाद मेरी आंखें नई दुनिया देखें थीम पर 25 अगस्त से आठ सितंबर तक नेत्रदान पखवाड़ा मनाया जाएगा। नागरिक अस्पताल में आने वाले मरीजों व तीमारदारों को नेत्रदान के प्रति जागरूक किया जाएगा। उन्होंने बताया कि नेत्रदान एक प्रक्रिया है। जिसके अंतर्गत व्यक्ति के मरने के बाद उसकी आंखों का दान किया जाता है। यह मृत व्यक्ति की पूर्व इच्छा या परिवारजनों की इच्छा पर निर्भर करता है।
नेत्रदान काउंसलर सुमन ने बताया कि कोई भी व्यक्ति किसी भी उम्र में मृत्योपरांत नेत्रदान कर सकता है। यहां तक कि उच्च रक्तचाप, मधुमेह, अस्थमा आदि बीमारी वाले व्यक्ति, जिस व्यक्ति का कॉर्निया मृत्योपरान्त पारदर्शी रहता है, वह नेत्रदान सकता है।
नेत्ररोग ओपीडी से अशोक राणा ने बताया कि पिछले छह सालों में नेत्र रोग ओपीडी में 2565 जागरूक लोगों ने शपथ पत्र भरा है। इनमें कई ऐसे लोग भी शामिल हैं। जिन्होंने परिवार के साथ शपथ पत्र भरा है। वहीं वर्ष 2021 से अगस्त 2024 तक 60 लोग मरणोपरांत नेत्रदान कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि नेत्रदान करने के लिए जिला नागरिक अस्पताल, करनाल के नेत्र रोग विभाग में संपर्क करें। आंखों से कॉर्निया मृत्यु के छह घंटे के अंदर निकाल लेना चाहिए। उन्होंने बताया कि आई बैंक टीम के आने से पूर्व ही आप मृत व्यक्ति के परिजन को सलाह दें कि जिस जगह मृत शरीर रखा है, उस जगह पंखा बंद कर दें, सर के नीचे तकिया रखें व आंखों को गिली रूई या बर्फ से ढक दें। इससे कॉर्निया खराब नहीं होगा।