14.... दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालु। संवाद
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से श्री शिव चित्र गुप्त मंदिर में हुआ सत्संग
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से श्री शिव चित्र गुप्त मंदिर में आयोजित सत्संग में प्रवचन करते हुए साध्वी यशोदा भारती ने कहा कि सारा संसार भिन्न-भिन्न भाषा, भूषा, रूप रंग व संप्रदायों वाले जीवों का गृहस्थान है, परंतु एक ज्ञानी भक्त इन विभिन्नताओं में भी अभिन्नता का अनुभव करता है। इन विभिन्नताओं के पीछे उस एक परम स्रोत रचयिता का दर्शन करता है, संपूर्ण चराचर जगत में ब्रह्म प्रकाश का अनुभव करना कोई साधारण बात नहीं है। यह केवल गुरु प्रदत्त दिव्य दृष्टि द्वारा ही संभव है। उसी से साधक प्रत्येक कृत्ति में व्याप्त उस एक पारलौकिक सत्ता का दर्शन कर पाता है।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण गीता में कहते हैं कि ''मयि सर्वमिदं प्रोतं सूत्रे मणिगणा इव'' अर्थात यह संपूर्ण जगत सूत्र में मणियों के साथ मुझ में पिरोया हुआ है। जो इस सार्वभौमिक ब्रह्म सूत्र का साक्षात्कार कर लेता है। उसी के लिए संपूर्ण जगत एक दिव्य माला और प्रत्येक जीव इस माला में गुंथी एक मणि के सामान हो जाता है। नामदेव, चैतन्य, मीरा, प्रहलाद, जैसे महान भक्तों ने भी हर कण, हर काया में श्री भगवान के दर्शन किए थे। चैतन्य महाप्रभु जब भी काली घटाओं को देखते थे तो उन्हें उसमें भी अपना श्याम कृष्णा दिखाई देता और उनके मुख से सहसा हा कृष्ण, हा कृष्ण निकल पड़ता।
14.... दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालु। संवाद