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Karnal News: दिवाली पर पटाखे जलाते समय बरतें सावधानी

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करनाल। दीपावली का त्योहार खुशियों, रोशनी और मिठास का प्रतीक है। इस पर्व पर घरों में दीप जलाने, मिठाइयां बांटने और आतिशबाजी करने की परंपरा है, लेकिन त्योहार के उत्साह में की गई लापरवाही सेहत पर भारी पड़ सकती है। जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने कहा कि पटाखों से निकलने वाला धुआं, तेज आवाज, आंखों में चिंगारी जाने का खतरा और अधिक मिठाइयों व तले हुए पकवानों का सेवन स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा कर सकता है। ऐसे में जरूरी है कि लोग दिवाली मनाते समय अपनी और परिवार की सेहत का विशेष ध्यान रखें।
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पटाखे जलाते समय बच्चों को अकेला न छोड़ें

नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. रजनीश ने बताया कि आतिशबाजी के दौरान आंखों और त्वचा को चोट पहुंचने का खतरा रहता है। पटाखे हमेशा खुले स्थान पर जलाएं और सुरक्षित दूरी बनाए रखें। बच्चों को पटाखे जलाते समय अकेला न छोड़ें। रॉकेट और अन्य पटाखों को घरों, वाहनों तथा बिजली की तारों के आसपास न जलाएं। पटाखा नहीं जलने पर दोबारा उसके पास जाकर आग लगाने का प्रयास न करें। आतिशबाजी के दौरान सूती कपड़े पहनना बेहतर है। मौके पर पानी की बाल्टी और प्राथमिक उपचार का सामान जरूर रखें।
उन्होंने कहा कि पटाखों से आंखों में चिंगारी जाने पर आंखों को रगड़ने या उनमें घरेलू पदार्थ डालने से बचें। दर्द, लालिमा या धुंधला दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सक से संपर्क करें। त्वचा जलने पर प्रभावित स्थान को करीब 20 मिनट तक ठंडे बहते पानी के नीचे रखें। जले हुए स्थान पर घी, तेल या टूथपेस्ट न लगाएं।
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मिठाइयों और चिकनाई वाले भोजन से करें परहेज
जनरल फिजीशियन डॉ. बीरेंद्र नाथ ने कहा कि दिवाली पर मिठाइयों, नमकीन और तले हुए पकवानों की अधिकता से खानपान बिगड़ जाता है। अधिक चीनी, घी और तेल का सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। ऐसे में मिठाइयों का सेवन सीमित मात्रा में करें और अधिक चिकनाई वाले भोजन से बचें। मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
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मिलावटी मिठाइयों से भी रहें सतर्क
मिठाई खरीदते समय दुकान की साफ-सफाई, खाद्य पदार्थों के रखरखाव और गुणवत्ता को देखें। खुले में रखी, मक्खियों से दूषित या असामान्य रंग और गंध वाली मिठाइयों से बचें। दूषित खाद्य पदार्थों के सेवन से उल्टी, दस्त और पेट दर्द की समस्या हो सकती है।
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धुएं से सांस के मरीजों को बचाएं

श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ. बलवान सिंह ने कहा कि पटाखों के धुएं से खांसी, आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी हो सकती है। अस्थमा के मरीजों, बुजुर्गों और छोटे बच्चों को धुएं से दूर रखें। सांस संबंधी परेशानी होने पर खुले और हवादार स्थान पर जाएं तथा जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सहायता लें। तेज आवाज वाले पटाखों से भी बचें, ताकि बुजुर्गों, बीमार लोगों और पालतू पशुओं को परेशानी न हो।
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