विर्क अस्पताल के नेत्र विशेषज्ञ डॉ. रोहित सरदाना की शिकायत की जांच के बदले छह लाख रुपये मांगने को लेकर दर्ज मामले में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। जांच रिपोर्ट फाइनल होने से पहले डॉ. रोहित सरदाना ने 8 अप्रैल को विजिलेंस को जांच कमेटी के सदस्य डॉ. दिवाकर की पैसे मांगने की शिकायत की थी। साथ ही एक पैन ड्राइव में रिश्वत मांगने की ऑडियो रिकार्डिंग भी दी। इसके कुछ ही दिन बाद सरदाना ने विजिलेंस को समझौता पत्र भी दिया और जिसमें कहा गया कि अब वे कार्यवाही नहीं चाहते और उनका समझौता हो गया है। हालांकि, विजिलेंस थाना ने इस पत्र शिकायत के साथ लगाकर आला अधिकारियों के पास भेज दिया। जांच के दौरान मामला भ्रष्टाचार का मिला तो एसीएस व विजिलेंस के निदेशक ने समझौता पत्र को दरकिनार कर डॉ. दिवाकर भटनागर के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत केस दर्ज करने के आदेश दिए। केस दर्ज होने के बाद से न तो डॉ. सरदाना सामने आ रहे हैं और न ही डॉ. दिवाकर। डॉ. दिवाकर का मोबाइल नंबर बंद आ रहा है, जबकि डॉ. सरदाना बार-बार यही कह रहे हैं कि वे करनाल से बाहर हैं। सूत्रों का दावा है कि शिकायतकर्ता और आरोपी दोनों ही डॉक्टरों को इस बात का दूर तक भी अनुमान नहीं था कि इस मामले में केस दर्ज हो सकता है, क्योंकि उनका पहले ही समझौता हो चुका था। अब केस दर्ज होने के बाद डॉक्टरों में हड़कंप मचा हुआ है। विजिलेंस की जांच पूरी होने के बाद ही इस मामले से पर्दा उठ पाएगा कि आखिर पूरा माजरा था क्या? गौरतलब है कि 16 अप्रैल को जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट दे दी थी, जिसमें डॉ. सरदाना को क्लीन चिट दी गई थी।
जांच के घेरे में कमेटी के सदस्य भी
विजिलेंस इस मामले को अब कई पहलुओं से जांच कर रही है। इस मामले में डॉ. सरदाना द्वारा दी गई शिकायत में आरोप लगाया है कि डॉ. दिवाकर जांच कमेटी के अन्य सदस्यों के नाम के भी पैसे मांग रहा है और अपने सीनियर अधिकारियों की भी बात कर रहा है। ऐसे में विजिलेंस जांच कमेटी के सदस्यों से भी पूछताछ कर सकती है। आडियो रिकार्डिंग में डॉ. दिवाकर कई सीनियर और अन्य अधिकारियों के नाम के पैसे की डिमांड कर रहा है। ऐसे में उन अधिकारियों से पूछताछ हो सकती है कि आखिर डा. दिवाकर ये बात किस आधार पर कह रहा था। फिलहाल रिकार्डिंग के वायस सैंपल को एफएसएल लैब में जांच के लिए भेजा जाएगा, जब ये कंफर्म हो जाएगा कि ये आवाज डॉ. दिवाकर की है, इसके बाद आगामी कार्रवाई होगी।
खबर छपी तो पीड़ित को मेडिकल कॉलेज बुलाया
फरवरी माह से पीड़ित सुरेश चक्कर पर चक्कर लगा रहा है, लेकिन न तो उसकी निजी अस्पताल ने सुनी और न ही सरकारी सिस्टम ने। अमर उजाला द्वारा सुरेश के दर्द को सबके सामने लाने के बाद अब सरकारी तंत्र जागा है और उसके इलाज को लेकर प्रक्रिया शुरू की है। अब सीएमओ आफिस की तरफ से कहा गया है कि सुरेश अपना इलाज मेडिकल कॉलेज में करा सकता है, उसको जो भी दिक्कत है, उसका समाधान किया जाएगा। वहीं, मेडिकल कालेज की तरफ से भी सुरेश को फोन करके सात अगस्त को उसे मेडिकल कॉलेज बुलाया गया है। सुरेश कुमार ने बताया कि उसे इलाज के लिए बुलाया गया है, लेकिन इससे पहले कभी किसी ने मेरी बात नहीं सुनी।
आला अधिकारियों के निर्देश के बाद ही डॉक्टर के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। डॉ. सरदाना ने पहले सबूतों समेत डॉ. दिवाकर के खिलाफ शिकायत दी थी। कुछ दिन बाद डॉ. सरदाना ने विलिजेंस को समझौता पत्र दिया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनका समझौता हो गया है और अब वे कार्यवाही नहीं चाहते हैं। शिकायत के साथ उनका समझौता पत्र भी आला अधिकारियों को भेजा गया था। एसीएस व डीजी के आदेश पर केस दर्ज किया गया है। फिलहाल डॉक्टर की वायस के सैंपल जांच के लिए मधुबन एफएसएल लैब में भेजा जाएगा। रिपोर्ट के बाद ही आगामी कार्रवाई की जाएगी। ये जांच का विषय है कि इसमें कोई और सदस्य भी शामिल है या नहीं। हम सभी पहलुओं पर जांच कर रहे हैं। - श्यामलाल, एसपी, विजिलेंस।