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Karnal News: कीटनाशकों का ज्यादा इस्तेमाल विदेशों में भारतीय चावल की साख को लगा रहा बट्टा

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- कारोबारी रिश्ते हो रहे खराब, घातक कीटनाशकों पर प्रतिबंध न लगने से चावल निर्यातकों की बढ़ी चिंता
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- पिछले साल चावल निर्यात तो बढ़ा, लेकिन कई देशों से कारोबारी रिश्ते हुए थे खत्म
- हरियाणा राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री व कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के एसीएस को लिखा पत्र
देव शर्मा
करनाल। बासमती हो या गैर बासमती चावल निर्यात, लेकिन चावल में कीटनाशक, खरपतवार नाशकों का निर्धारित मात्रा से अधिक अवशेष पाए जाने से भारतीय चावल निर्यात प्रभावित हो रहा है। यूरोपीय संघ, अमेरिका, जापान, ओमान, कुवैत, कतर आदि कई देशों से चावल का निर्यात बेहद कम हो गया है। साथ ही भारतीय चावल की साख भी खराब हुई है। चावल निर्यातकों की मांग पर पिछले साल पंजाब की तरह हरियाणा सरकार ने भी कुछ माह के लिए करीब नौ कीटनाशकों की बिक्री व उपयोग पर प्रतिबंध लगाया था, लेकिन इस साल अभी सरकार ने इस पर संज्ञान नहीं लिया है। चावल की गुणवत्ता से चिंतित हरियाणा राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ने कृषि एवं किसान कल्याण विभाग को पत्र लिखकर अतिशीघ्र कीटनाशकों पर प्रतिबंध लगाए जाने की मांग की है।
ये दीगर बात है कि भारत का चावल निर्यात बढ़ा है। बासमती चावल का निर्यात 2022-23 में 45.60 लाख टन तक पहुंच गया है, जबकि गैर बासमती चावल के निर्यात पर रोक लगने से पहले तक करीब एक करोड़ 78 लाख टन तक से अधिक हो चुका था। जबकि 2021-22 में बासमती का निर्यात 39.85 लाख टन और गैर बासमती का निर्यात एक करोड़ 72 लाख टन हुआ था। ये आंकड़े बताते हैं कि भारतीय चावल का कारोबार दुनिया के 160 देशों तक फैल चुका है और पिछले साल की अपेक्षा बढ़ा है, लेकिन ये भी सच्चाई है कि किसानों द्वारा अधिक पैदावार लेने के चक्कर में निर्धारित मात्रा से अधिक कीटनाशक व खरपतवार नाशक दवाओं का प्रयोग किया जा रहा है। जिसका असर खाद्यान्न यानी चावल में भी पहुंच रहा है। जिसे विदेशी पसंद नहीं कर रहे हैं।
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किसानों को किया जागरूक
हरियाणा राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के राज्य प्रधान सुशील जैन बताते हैं कि भारतीय चावल में निर्धारित मात्रा से अधिक कीटनाशक दवाओं के अवशेष मिलने से विदेशों में भारतीय चावल की साख को बट्टा लग रहा है। इतना ही नहीं यूरोपीय संघ, अमेरिका, जापान, ओमान, कुवैत, कतर आदि कई देशों से कारोबारी रिश्ते खत्म हो गए हैं या फिर उनमें चावल निर्यात बेहद कम हो गया है। हालांकि पिछले साल से ये स्थिति सुधरी है, क्योंकि कई देशों द्वारा भारतीय चावल को लेने से इनकार करने के बाद चावल निर्यातकों ने भी किसानों को कीटनाशकों का प्रयोग जरूरत से अधिक नहीं करने के प्रति जागरूक किया। साथ ही चावल निर्यातकों की मांग पर 17 अगस्त 2022 को अधिसूचना जारी कर हरियाणा सरकार ने नौ कीटनाशकों की बिक्री, भंडारण, वितरण और उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया था। अब खेतों में धान की रोपाई हो चुकी है, किसान कीटनाशकों, खरपतवारनाशकों का प्रयोग करना शुरू कर चुके हैं, लेकिन सरकार ने अब तक चावल के खतरनाक माने जाने वाले कीटनाशकों की बिक्री पर प्रतिबंध नहीं लगाया है। जो चावल निर्यात के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।
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धान की रोपाई हुए करीब एक महीना हो चुका है, किसान कीटनाशकों का प्रयोग करने लगे हैं। देखा जा रहा है कि बाजार में कई तरह के खतरनाक कीटनाशकों का विक्रय धड़ल्ले से किया जा रहा है। यदि सरकार ने पिछले साल की तरह खरपतवार नाशक माने जाने वाले कीटनाशकों पर प्रतिबंध नहीं लगाया तो चावल निर्यात को एक बार फिर झटका लग सकता है। हरियाणा राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन की ओर से दो अगस्त को कृषि एवं किसान कल्याण विभाग हरियाणा के अपर मुख्य सचिव सुधीर राजपाल और मुख्यमंत्री मनोहर लाल को पत्र लिखकर पिछले साल प्रतिबंधित किए गए नौ सहित 10 चयनित कीटनाशकों पर प्रतिबंध लगाए जाने की मांग की गई है। हालांकि अभी तक कोई आदेश जारी नहीं किया जा सका है। जिससे चावल निर्यातक चिंतित हैं।
- सुशील जैन, राज्य प्रधान-हरियाणा राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन
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