करनाल। सैनिक जब सेवानिवृत्त होता है तो सामाजिक जीवन की कठिनाइयां सामने आती हैं। समाज या सरकार के अधिकारी व कर्मचारियों का सहयोग नहीं मिल पाता तो परेशानी होती है। पूर्व सैनिकों का कहना है कि समाज के लोगों को भी उनकी भावनाओं को समझने की आवश्यकता है। पूर्व सैनिकों की अपेक्षा है कि सरकारी कार्यालयों में सम्मान के साथ उन्हेंं कार्य भी मिले।
सरकार सख्त हिदायत जारी करें
भारतीय नौसेना के रिटायर्ड पेटी ऑफिसर विजेंद्र सिंह कहते हैं कि वैसे तो पूर्व सैनिकों के लिए बहुत सी योजनाएं सरकारें बनाती है लेकिन उनका कार्यान्वयन अच्छे तरीके से नहीं हो पाता है। सभी सरकारी कार्यालयों में सैनिकों और पूर्व सैनिकों के साथ सम्मान से पेश आया जाए, ऐसी सख्त हिदायतें सरकार को जारी करनी चाहिए। सरकारी कार्यों के टेंडर्स को पूर्व सैनिकों के लिए किसी हद तक रिजर्व कर देना चाहिए ताकि कार्य ईमानदारी से हो सकें। पुलिस अकादमी में ट्रेनिंग के लिए पूर्व सैनिकों को लगाया जाना चाहिए।
पूर्व सैनिकों के बेटों को भी दिया जाए कोटा
- भारतीय नौसेना से रिटायर्ड रेगुलेटिंग पेटी ऑफिसर जनक राज कहते हैं कि हरियाणा स्टाफ सलेक्शन बोर्ड की कार्यप्रणाली ठीक ही है, यदि किसी दिव्यांग पूर्व सैनिक को आरक्षण मिलता है तो सम्मान की बात है। दिव्यांग पूर्व सैनिक के सही सलामत बेटे को कोटा देने के बारे में सरकार को संशोधन करना चाहिए, ताकि अन्य पूर्व फौजियों को अधिक लाभ पहुंच सके। शेष तो सरकार की ओर से काफी बेहतर सेवाएं हैं। जिला सैनिक कल्याण बोर्ड से भी मदद मिलती ही है।