करनाल। अब हर किसान की प्रमाणिक एवं डायनामिक डिजिटल पहचान होगी। ताकि उन्हें सरकार की योजनाएं और खेत व कृषि संबंधित समय पर सटीक जानकारी मिल सके। केंद्र सरकार के विजन पर प्रदेश सरकार डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन 2024 को लागू करने जा रही है। पायलट परियोजना के तहत जिले में एग्री स्टैक डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) लागू किया जा रहा है। जिसके तहत किसानों को पारदर्शी भरोसेमंद और डाटा आधारित सेवाएं मिल सकेंगी।
मिशन को पूरी तरह से लागू करने के लिए कृषि विभाग की ओर से टीम को तैयार किया जा रहा है। इसके लिए बुधवार को उप निदेशक कृषि विभाग के कार्यालय में पहली बैठक हुई। जिसमें जिला स्तर की टीम को प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद तहसील और खंड स्तर पर टीम को तैयार किया जाएगा। इसके बाद आने वाले ग्राम स्तर पर शिविर आयोजित करके किसानों के पंजीकरण किए जाएंगे। परियोजना के नोडल अधिकारी एवं कृषि उप-निदेशक डॉ. वजीर सिंह ने बताया कि प्रत्येक किसान का इसमें पंजीकरण कराना अनिवार्य है। क्योंकि पीएम किसान सम्मान निधि की आगामी 22वीं किस्त का लाभ भी इसी योजना के माध्यम से दिया जाएगा। ब्यूरो
कृषि विभाग के उप निदेशक डॉ. वजीर सिंह ने बताया कि हरियाणा में रबी 2026 सीजन से इसे राज्य की सभी तहसीलों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इसके लिए जिला में आज जिला राजस्व विभाग के व कृषि विभाग के सभी कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया है जिसके बाद तहसील व गांव स्तर पर कैंप लगाकर किसान रजिस्ट्री का कार्य युद्ध स्तर पर शुरू करेगा। एग्री स्टैक के लागू होने से हरियाणा के किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे (डीबीटी) के माध्यम से बिना किसी मध्यस्थ के और डाटा आधारित सटीकता के साथ मिलेगा। इससे पीएम किसान सम्मान निधि फसलों का बीमा ऋण सुविधा और न्यूनतम समर्थन मूल्य जैसी सेवाओं का लाभ उठाना और भी आसान हो जाएगा। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक किसान के लिए एक प्रमाणित और डायनामिक डिजिटल पहचान तैयार करना व सटीक स्थान निर्धारण के लिए गांवों की सीमाओं का डिजिटल मानचित्रण करना और बोई गई फसलों का रियल टाइम और सटीक रिकॉर्ड तैयार किया जाना है।