अपने दर्द को सांझा करता शहीद नरेंद्र सिंधु का परिवार। स्वयं
राजौंद। गांव रोहेड़ा के शहीद नरेंद्र सिंधु के परिवार के एक सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति देने के आश्वासन के महीनों बाद भी नौकरी नहीं मिल पाई है। शहीद का परिवार कार्यालयों के चक्कर काटकर परेशान हो चुका है। परिवार वालों ने बताया कि नरेंद्र सिंधु का नाम उन जाबाज सैनिकों में दर्ज है जिन्होंने पहलगाम आतंकी हमले में शामिल दो लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों को मार गिराया और देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।
उनके इस साहस को सम्मान देते हुए राज्य सरकार ने परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की थी। यह घोषणा परिवार के लिए आर्थिक सहारा होने के साथ-साथ शहीद के बलिदान का सम्मान भी थी। हालांकि घोषणा के बाद फाइलें दफ्तरों में घूमती रह गईं और प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। शहीद के चाचा और भाई ने कई बार संबंधित विभागों के चक्कर लगाए और आवेदन दिए लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला। इस बीच परिवार की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। घर में बुजुर्ग माता-पिता हैं जिनकी जिम्मेदारी भी परिवार पर है। शहीद नरेंद्र सिंधु के चाचा बीरबल सिंधु ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले को प्राथमिकता के आधार पर लिया जाए और जल्द से जल्द नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की जाए। उन्होंने कहा कि शहीद के परिवार को न्याय दिलाना पूरे समाज का नैतिक दायित्व है।
अपने दर्द को सांझा करता शहीद नरेंद्र सिंधु का परिवार। स्वयं