माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। नहर की पटरी तो दूर इन्हें पार करने के लिए बनाए पुलों के साथ भी ग्रिल या दीवार नहीं है। 27 अगस्त को हुई सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में एडीसी सोनू भट्ट ने इस लापरवाही पर सिंचाई विभाग के अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा था। एक माह बीतने के बाद मंगलवार को हुई बैठक में भी अधिकारी स्थिति स्पष्ट नहीं कर पाए। न ही इन कट को बंद किया गया है। ऐसे में सख्त हुए एडीसी ने कहा कि लोगों की जान जोखिम में है, इन्हें शीघ्र बंद कराएं।
उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि बताएं पश्चिमी यमुना नहर के पर ग्रिल के कट क्यों हैं, इनका क्या प्रयोग है, यदि कोई वैध प्रयोग नहीं है तो इन्हें बंद क्यों नहीं किया जा रहा है। विदित हो कि अमर उजाला की ओर से इस मुद्दे को उठाया गया था। तीन अगस्त के अंक में अमर उजाला ने अलग-अलग नहरों पर बने पुलों की स्थिति को प्रमुखता से उजागर किया था। इस मुद्दे पर संज्ञान लेते हुए अगस्त माह में सड़क सुरक्षा समिति की बैठक के एजेंडे में भी शामिल किया गया। बैठक में यह विषय सामने आते ही एडीसी ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों से जवाब मांगना शुरू कर दिया।
हालात : पलक झपकी तो गाड़ी सीधा नहर में
नहरों की पटरी तो दूर इन्हें पार करने के लिए बनाए हुए पुल भी खतरे से खाली नहीं है। यहां से गुजरते हुए किसी वाहन चालक से हल्की लापरवाही हुई नहीं और गाड़ी सीधा नहर के अंदर। क्योंकि नहर पर बने पुलों के साथ से गुजर रही पटरी पर ग्रिल नहीं है। कई जगह तो पुल भी सड़क की सीध में नहीं हैं। सीधे चलते हुए मोड़ लेकर तिरछे पुल पर चढ़ना पड़ता है, ऐसे में यहां हादसे की आशंका ज्यादा है। रात में हादसे की संभावना और ज्यादा बढ़ जाती है। क्योंकि किसी भी पुल पर ट्रैफिक सिग्नल या स्ट्रीट लाइट भी नहीं है, जिसे देखकर चालक दूर से स्थिति को भांप ले। अगस्त माह में भी नहर में कार गिरने के दो मामले सामने आ चुके हैं। दोनों ही मामलों में गाड़ी रात में नहर में गिरी है।