- सहकारी चीनी मिल करनाल और हैफेड की असंध चीनी मिल संयुक्त रूप से बनाएगी अत्याधुनिक प्लांट
- गन्ने की बढ़ेगी मांग, किसानों को पहुंचेगा फायदा
देव शर्मा
करनाल। सहकारी चीनी मिल करनाल शीरे से इथेनॉल बनाने के लिए बड़ा प्लांट लगाने की तैयारी में है। ये प्लांट सहकारी चीनी मिल करनाल व हैफेड चीनी मिल असंध का संयुक्त इथेनॉल क्लस्टर प्लांट होगा। जो 120 किलो लीटर प्रति दिन (केएलपीडी) की क्षमता का होगा। जिस पर लगभग 215 करोड़ का खर्च आएगा। हरियाणा सरकार ने इस संयुक्त परियोजना को स्थापित करने की अनुमति दे दी है। इस प्लांट में शीरे से सिर्फ इथेनॉल ही नहीं बल्कि कई बायप्रोडक्ट भी तैयार होंगे, जैसे प्रेसमड, पोटास (नाइट्रोजन खाद), निष्प्रयोज्य बायोमॉस भी बिकेगा, बिजली उत्पादन बढ़ेगा, शेष बची राख भी बेची जाएगी, जिससे चीनी मिल की आय में इजाफा होगा। इसके लिए गन्ने की मांग बढ़ेगी, जिसका सीधा फायदा किसानों को पहुंचेगा।
दि सहकारी चीनी मिल करनाल के प्रबंध निदेशक हितेंद्र कुमार ने बताया कि करनाल की दि सहकारी चीनी मिल और असंध स्थित हैफेड की चीनी मिल का संयुक्त इथेनॉल प्लांट करनाल चीनी मिल परिसर में बनेगा। स्थान चयनित कर लिया गया है। प्लांट का डिजाइन व इस्टीमेट बनाकर हरियाणा सरकार को भेजा गया था। जिसकी अनुमानित लागत 21500 लाख रुपये है। जिसे हरियाणा सरकार ने स्वीकृति प्रदान कर दी है।
अभी तक चीनी मिल से निकलने वाला शीरा ऑनलाइन बेच दिया जाता है, लेकिन प्लांट तैयार होने के बाद शीरा बेचा नहीं जाएगा, बल्कि इससे इथेनाॅल तैयार किया जाएगा। गन्ने की कुल पेराई का करीब पांच प्रतिशत शीरा बनता है। पेराई सत्र 2022-23 में करीब 56 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई हुई थी, जिसमें 2.77 लाख क्विंटल शीरा बना था। दोनों चीनी मिलों का ये संयुक्त क्लस्टर प्लांट 120 किलो लीटर प्रति दिन (केएलपीडी) की क्षमता का होगा। चीनी मिल इस बार अपनी पूरी क्षमता के साथ चल रही है। किसानों से गन्ने का रकबा भी बढ़ाया जाएगा, क्योंकि प्लांट स्थापना के बाद अधिक गन्ने की आवश्यकता भी होगी। अभी तक किसी चीनी मिल के किनारे से गुजरने पर ही बदबू का एहसास होता है, क्योंकि उससे खराब पानी निकलता है लेकिन इस प्लांट के बाद ऐसा नहीं होगा।
चीनी मिल से एक बूंद भी गंदा पानी नहीं आएगा बाहर
शीरे से इथेनाॅल तो बनेगा ही, साथ ही इसके साथ कई अन्य बायप्रोडक्ट भी बनेंगे, जिससे चीनी मिल की आय बढ़ेगी। बिजली अधिक उत्पादित होगी। खास बात ये होगी कि यहां ऐसी व्यवस्था की जा रही कि ये मिल प्रदेश की ऐसी चीनी मिल बन जाएगी, जिसमें से एक बूंद भी गंदा पानी बाहर नहीं निकलेगा। चीनी मिल पूरी तरह इकोफ्रेंडली हो जाएगी। प्लांट स्थापना की प्रक्रिया शीघ्र ही शुरू की जाएगी। गन्ने से चीनी की रिकवरी भी बढ़ेगी। चीनी मिल की आय में बढ़ोतरी के साथ गन्ने की खपत बढ़ेगी तो किसानों को सीधा लाभ पहुंचना भी स्वाभाविक है।
- हितेंद्र कुमार, प्रबंध निदेशक, दि सहकारी चीनी मिल, करनाल