संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित गांव शिमला के बस अड्डे के पास सरकारी जमीन पर हुए अवैध अतिक्रमण ने आम जनता और वाहन चालकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हाईवे किनारे रेत, बजरी और कंक्रीट डालकर कब्जा किए जाने से सड़क की चौड़ाई सिमट गई है, जिससे यातायात प्रभावित हो रहा है।
बस अड्डे पर हालात और भी चिंताजनक हैं। बसों का इंतजार करने वाले यात्रियों को खड़े होने के लिए भी पर्याप्त जगह नहीं मिल रही। सड़क किनारे निर्माण सामग्री के ढेर लगे होने के कारण लोगों को मजबूरन सड़क पर खड़ा होना पड़ता है, जिससे हर समय हादसे का खतरा बना रहता है।
धूल और रेत के गुबार से स्थिति और गंभीर हो गई है। तेज रफ्तार वाहन गुजरने पर रेत हवा में उड़ती है, जिससे दृश्यता कम हो जाती है और वाहन चालकों को सड़क साफ दिखाई नहीं देती। खासकर दोपहिया चालकों के लिए यह बेहद खतरनाक साबित हो रहा है, क्योंकि आंखों में रेत जाने से संतुलन बिगड़ सकता है।
शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं
ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित विभाग इस समस्या को लंबे समय से नजरअंदाज कर रहा है। कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। लोगों का कहना है कि सार्वजनिक स्थान पर इस तरह निर्माण सामग्री डालना नियमों का उल्लंघन है, फिर भी जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि हाईवे की जमीन को जल्द से जल्द अतिक्रमण मुक्त कराया जाए और सड़क किनारे जमा रेत-बजरी को हटाया जाए, ताकि यातायात सुचारु रूप से चल सके और लोगों को राहत मिल सके।