करनाल। बिजली एवं रखरखाव के बिलों के भुगतान के मामले को लेकर अल्फा सिटी के करीब 400 घरों की बिजली काट दी गई, जिससे लोगों में भारी रोष व्याप्त हो गया। शिकायत पर तहसीलदार और थाना प्रभारी मौके पर पहुंचे और अल्फा कार्प व बिजली अधिकारियों से बातचीत के बाद शाम को 7.30 बजे बिजली को सुचारु कर दिया गया। करीब साढ़े छह घंटे पूरी कालोनी की बिजली गुल रही। तहसीलदार ने बुधवार को सुबह 11 बजे दोनों पक्षों को बातचीत के लिए बुलाया है।
अल्फा सिटी आरडब्ल्यूए के प्रधान प्रो. जोगेंद्र मदान ने बताया कि अल्फा कार्प ने मंगलवार को दोपहर एक बजे अल्फा टाउनशिप की बिजली काट दी। इससे अल्फा सिटी में करीब 400 घरों में परेशानी खड़ी हो गई। लोग गर्मी और उमस से बेहाल हो उठे। महिलाओं व बच्चों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। अल्फा कार्प का कहना है कि बिजली के बिल व रखरखाव का आठ लाख रुपया बकाया है, जबकि ऐसा नहीं है। कंपनी के पास करीब 12 करोड़ रुपये बतौर जमानत राशि जमा है। इसके बाद भी इस बार अनाधिकृत तरीके से करीब 45 फीसदी रखरखाव शुल्क को बढ़ा दिया गया है। पहले यह शुल्क 2.50 रुपये प्रति गज था, जो अब 3.50 रुपये कर दिया गया है। इसी को लेकर कंपनी के साथ स्थानीय निवासियों का विवाद है। इससे पहले भी यहां की बिजली काटी गई थी लेकिन देर शाम सुचारु कर दी गई है। स्थानीय वाशिंदों ने जब अधिकारियों तक बात पहुंचाई तो देर शाम तहसीलदार व सदर थाना प्रभारी यहां पहुंचे। प्रबंधन व बिजली बोर्ड के अधिकारियों से बातचीत की गई। फिलहाल करीब 7.30 बजे अल्फा सिटी की बिजली को सुचारु कर दिया गया है, जिससे लोगों तो तात्कालिक राहत मिल गई है। प्रो. मदान ने बताया कि मामले पर बातचीत करने के लिए तहसीलदार ने दोनों पक्षों को बुधवार को सुबह 11 बजे अपने कार्यालय बुलाया है। रोष जाहिर करने वालों में पूर्व प्रधान कुलदीप कादियान, सुरेंद्र सिंह, नीरज गुप्ता, हरपाल सिंह, कमल धवन, कुलदीप बड़ैच आदि शामिल रहे।
समझौते के अनुसार सभी सेवाएं अल्फा सिटी के बाशिंदों को दी जा रही है। 50 प्रतिशत से अधिक लोग 2018 से बिजली के बिल व रखरखाव का भुगतान नहीं कर रहे हैं। अब तक हम अपने संसाधनों से भुगतान करते आए हैं, लेकिन हमारी भी सीमा है। हमने बिजली बिल के भुगतान के लिए बिजली बोर्ड से कुछ और समय मांगा है। इसे लेकर अभी बातचीत चल रही है।
-पंकज सेहरावत संपत्ति प्रबंधक अल्फा कॉर्प करनाल।