करनाल। इस साल की शुरुआत परिवहन की दृष्टि से शानदार हुई थी। नए साल में शहर को इलेक्ट्रिक बस सुविधा की सौगात मिली। साथ ही बेड़े में नई बसें भी काफी संख्या में आईं। लेकिन विडंबना यह है कि बसों की संख्या डिपो में नहीं बढ़ पाई। जितनी बसों से बस अड्डा पांच साल पहले चलता था आज भी उतनी ही संख्या है।
इधर, पूरे साल में इलेक्ट्रिक बसों के लिए अलग से बनने वाले बस अड्डे के निर्माण कार्य शुरू होने का और असंध में बने रोडवेज के सब डिपो को बसों के आने का इंतजार है।
चुनावी साल में यह उम्मीदें अभी हैं। इसके अलावा सरकार की ओर से निशुल्क सफर के लिए शुरू की गई हैप्पी कार्ड योजना से जनता के चेहरे पर खुशी आई है। करीब एक लाख आबादी को इसका लाभ मिला है।
वहीं कर्मचारियों की दृष्टि से देखें तो रोडवेज में केवल नई बसें ही शामिल हुईं। जबकि नए कर्मचारियों और अधिकारियों के आने का बेड़ा साल भर इंतजार करता रहा। ऐसे में असंध सब डिपो की शुरुआत नहीं हो पाई और निगदू और नीलोखेड़ी बस अड्डे का निर्माण कार्य अधर में है।
पिछले चार वर्षों से बसों के लगातार कंडम होने के कारण जनवरी 2024 में करनाल डिपो के बेड़े में महज 90 बसें ही रह गई थी, जोकि अब 10 एसी और 21 मिनी समेत अन्य नई बसों के आने के बाद बढ़कर 160 पर पहुंच गया है। यदि पुरानी बसें कंडम न होती तो आंकड़ा 200 से पार पहुंच जाता। इन बसों के आने के बाद भी बेड़ा महज 2019 की बसों के आंकड़े को ही छू पाया है। जबकि आबादी के हिसाब से करनाल डिपो को 250 बसों की जरूरत है। ऐसे में बसों की कमी होने के कारण कई अंतरराज्यीय मार्गों पर भी बस सेवा शुरू नहीं हो पा रही है। हालांकि अभी 30 बसें बेड़े में और शामिल होनी है और बस अड्डे भी बनने हैं, इससे 2025 में व्यवस्था और बेहतर होने की उम्मीद है। वर्तमान में करनाल डिपो से 30 अंतरराज्यीय मिलाकर 170 से ज्यादा मार्गों पर बसों का संचालन होता है। ै
मेरठ-------बच्चा पार्क स्थित सेंट थॉमस चर्च में प्रार्थना सभा मे भाग लेते श्रद्वालु----नीटू- फोटो : वीडियो ग्रैब