संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। सरकार जहां एक ओर बुजुर्गों और विधवाओं को पेंशन देने के लिए कई योजनाएं चला रही है, वहीं दूसरी ओर पेंशन विभाग के कर्मचारी बुजुर्गों की मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं। पेंशन से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए विभाग के चक्कर काट रहे बुजुर्गों को हर बार किसी न किसी बहाने से एक स्थान से दूसरे स्थान भेज दिया जाता हैै। इससे बुजुर्गों में नाराजगी है।
पेंशन न आने, खाते में राशि अटकने, दस्तावेजों में मामूली त्रुटि या आधार व बैंक खाते की लिंकिंग जैसी समस्याओं को लेकर हर रोज कई बुजुर्ग कार्यालय में पहुंच रहे हैं लेकिन उन्हें पेंशन के लिए भटकाया जा रहा है। बुजुर्गों का कहना है कि वे पिछले कई महीनों से विभाग के चक्कर काट रहे हैं लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
- केस एक
भोला खोसला गांव से आई बुजुर्ग महिला ने बताया कि वह अपनी पेंशन शुरू करवाने के लिए तीन महीने से पेंशन विभाग के चक्कर काट रही हैं। उन्होंने कहा कि उनका सही नाम विमला है। छह महीने पहले उनके पति का देहांत हो गया था। उन्होंने कहा कि सभी दस्तावेजों जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड और पहचानपत्र में उनका नाम विमला देवी दर्ज है जबकि वोटर कार्ड में उनका नाम निर्मला देवी कर दिया गया है। इस नाम को बदलवाने के लिए यहां के कर्मचारी कभी उन्हें नीलोखेड़ी तो कभी दूसरे ब्लॉक भेज देते हैं। उन्होंने कहा कि यहां के कर्मचारी बुजुर्गों की मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं।
- केस दो
बाल पबाना गांव से आई 70 वर्षीय बुजुर्ग धनपति ने बताया कि तीन महीने से उनके खाते में पेंशन नहीं आई है। उनका कहना है कि पेंशन विभाग के कर्मचारी बताते हैं कि उनका खता चालू नहीं है इसलिए पेंशन नहीं मिल पा रही है। धनपति ने बताया कि उनके पति का कुछ महीने पहले ही देहांत हो गया है। पेंशन ही उनका आखिरी सहारा है। इसी से घर का गुजारा चलाने की कोशिश करती है। उनका खाता गांव की केनरा बैंक शाखा में है और खाता बंद नहीं हुआ है तब भी उन्हें खाता बंद होने का कहकर तीन महीने से पेंशन नहीं दी जा रही है। उन्होंने जल्द से जल्द पेंशन दिलवाने की गुहार लगाई है।