संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। सरकारी स्कूलों में ड्राप आउट बच्चों की संख्या कम करने के शिक्षा विभाग के प्रयास रंग लाए हैं। पढ़ाई छोड़ने या ड्राप आउट विद्यार्थियों की संख्या इस साल पिछले तीन सालों के मुकाबले घटी है। इस साल ड्राप आउट विद्यार्थियों की संख्या 330 रही। वर्ष 2022 में यह संख्या 340 थी व 2023 में यह संख्या 402 दर्ज की गई थी।
ड्राप आउट विद्यार्थियों में ज्यादातर झुग्गी झोपड़ी व बस्ती में रहने वाले बच्चे होते हैं। इनके लिए जिला शिक्षा विभाग साल में दो बार जागरूक करने का अभियान चलाता है। इस कार्य के लिए करनाल में 14 व इंद्री में एक स्पेशल प्रशिक्षण केंद्र भी बनाया गया है। यहां बच्चों को स्कूल से जोड़ने के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है।
ऐसे ड्रॉपआउट विद्यार्थी जो किन्हीं कारणों से बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते हैं और छोटी उम्र में ही घर चलाने के लिए काम पर लग जाते हैं। उनकी पढ़ाई को शुरू करवाने के स्पेशल ट्रेनिंग सेंटर खोले जाते हैं।
जिनके माध्यम से ऐसे विद्यार्थियों के घर-घर जाकर उनको विभाग के एबीआरसी, विषय विशेषज्ञ, अध्यापक, डीपीसी, एपीसी व जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जागरुक करने का काम करते है। जिला शिक्षा विभाग की आर से सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले सभी विद्यार्थियों को वर्दी, पुस्तकें, फीस माफी, छात्रवृति, मिड-डे मिल की सुविधा दी जाती है। विद्यार्थियों का मानसिक व शारीरिक विकास के लिए प्रतियोगिता भी आयोजित की जाती रही हैं। कुछ सालों से विद्यार्थियों को फ्री नीट, इंजीनियरिंग की कोचिंग भी दी जाती है। ड्राउट आउट बच्चों को कम करने के लिए करनाल में फूसगढ़ में दो, सेक्टर छह में दो, सेक्टर सात दो, बुढाखेड़ा में दो, बांसो गेट मे तीन, सेक्टर-13 में एक तथा प्रेमनगर में एक स्पेशल ट्रेनिंग सेंटर हैं।