करनाल। कर्णनगरी नशे की हॉट स्पॉट बन रही है। यहां विभिन्न राज्यों से नशा पहुंच रहा है। नशा तस्कर न केवल जिले में बल्कि यहां से अन्य इलाकों में भी नशा भेजा जा रहा है। जिले में नशा तस्करों का नेटवर्क इस कदर मजबूत होता जा रहा है कि इसे तोड़ना पुलिस के लिए चुनाैती से कम नहीं है।
जिले में नशीले पदार्थ अलग-अलग राज्यों से आता है। नशा तस्कर उत्तर प्रदेश से स्मैक, बिहार से गांजा पत्ती, राजस्थान से चूरापोस्त, झारखंड से अफीम ला रहे हैं। इन बड़े नशा तस्करों का नेटवर्क तोड़ने के लिए पुलिस भी जुटी हुई है। ये तस्कर न केवल शहरी बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी अपनी जड़े जमा रहे हैं।
शहर की बात करें तो कॉलोनियों में नशा बेचने वाले व्यक्ति पान की दुकान, विभिन्न चौराहों व पार्कों में घूमते रहते हैं। जो नशीले पदार्थ की पुड़ियां बनाकर जेब में रखते हैं और जिन्हें नशा करने वाले लोगों तक पहुंचा रहे हैं। यह नशा तस्कर आर्डर मिलते ही थोड़ी देर में नशेड़ियों तक पहुंच जाते हैं।
नशा तस्करों ने महिलाओं को भी अपने गिरोह में शामिल कर रखा है। पुलिस ने कई ऐसी महिलाओं को भी पकड़ा है। नशा तस्कर महिलाओं को इसलिए शामिल कर रहे हैं ताकि पुलिस उनपर शक न करें और महिलाएं आसानी से नशे की आपूर्ति कर दे। जिले में तस्कर अफीम की खेती तक करने लगे हैं। असंध और निसिंग में ऐसे कई मामले सामने आ चुके है। जिसमें पुलिस ने तस्करों के खेत से अफीम की पौध बरामद की थी। सन 2021 व 2022 में पुलिस ने अफीम के 183 किलो पौधे और 2021 में सात किलो पौधे बरामद किए थे।
इस साल 227 आरोपियों को किया गिरफ्तार
पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत जनवरी से लेकर 27 नवंबर तक 129 मामले अभी तक दर्ज किए है। इन मामलों में पुलिस ने 227 नशा तस्करों को काबू किया है। जिनसे अफीम 22.751 किलोग्राम, चरस 11.069 किलोग्राम, गांजा पत्ती 88.083 किलोग्राम, नशीली दवाइयों में 147799 गोलियां, 231758 कैप्शूल, 20 एमटीपी किट, अफीम के पौधे 48 स्मैक 689 ग्राम, गट्टू 26.175 किलोग्राम पकड़ा है।
इंजेक्शन से नसों में दौड़ रहा नशा
सुल्फा, गांजा, स्मैक के साथ-साथ युवाओं में इंजेक्शन से नशा लेने की लत भी बढ़ती जा रही है। खिलाड़ी भी इसमें पीछे नहीं हैं। कुछ युवा नशे के लिए इंजेक्शन लगा रहे हैं तो कुछ अपनी बॉडी बनाने या फिर किसी खेल प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए नशे के इंजेक्शन लगा रहे हैं। इससे अलग युवक नशीली दवाओं का नशा करते हैं। स्टेडियम, खंडहर भवन, पार्क व शौचालय में अक्सर नशे के खाली इंजेक्शन देखने को मिल रहे हैं। यूपी से नशा तस्कर नशीली दवाएं लेकर आ रहे हैं।
व्हाट्सएप के माध्यम से देते हैं आर्डर
शहर व गांव में नशा तस्कर छोटी छोटी पुड़िया बनाकर रखते हैं। पहले नशा करने वाला तस्कर के पास नशा लेने जाता था लेकिन अब नशा तस्कर ही नशेड़ी के पास खुद पहुंच जाते हैं। इस धंधे से जुड़े एक व्यक्ति ने बताया कि अब नशा बेचने वाले कई हो गए हैं, इसलिए वे अपने ग्राहक पक्का रखने के लिए खुद ही उन तक नशा देने पहुंच जाते हैं। नशेड़ी के नशा सप्लाई करने वाले व्यक्तियों से संपर्क होते हैं। वह व्हाट्सएप कॉल व व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से तस्कर को ऑर्डर देते हैं। नशा तस्कर बताई जगह पर नशा लेकर पहुंच जाता है। तस्कर उसे ही नशा देते हैं, जिसे वह जानते हैं। संवाद