यमुना से सटे लगभग पांच गांव के चकबंदी विवाद से पीड़ित किसानों की मांगें पूरी न होने पर मंगलवार को गांवों से पलायन कर दिल्ली के लिए कूच करेंगे।
ग्रामीणों ने दिल्ली जाने की तैयारी पूरी कर ली है। ग्रामीणों में प्रशासन के खिलाफ गहरा रोष नजर आया। उन्होंने चेताया कि जब तक हमारी समस्या का हल नहीं होता तब तक दिल्ली में डेरा जमाए रखेंगे।
गांव कालरम, कैरवाली, लालुपूरा, अराईपुरा, भरतपुर, अमृतपुर कलां के ग्रामीणों का काफी दिनों से चकबंदी का विवाद चल रहा है।
ग्रामीणों ने अपनी मांगों को पूरा कराने के लिए धरने, प्रर्दशन, रेल रोकने सहित सभी हथकंडे अपना लिए हैं, लेकिन ग्रामीणों को प्रशासन ने कोरे आश्वासनों के सिवाय कुछ नहीं मिला। आखिरकार पांचों गांवों के ग्रामीणों ने गांव से पलायन करके दिल्ली जाने का मन बना लिया है।
किसान नेता प्रदीप मराठा ने बताया कि प्रशासनिक अधिकारी भूमाफिया के लोगाें से मिलीभगत करके कोई कार्रवाई नहीं कर रहे है और ग्रामीणों को केवल कोरे आश्वासन दे रहे है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सहायक चकबंदी अधिकारी, हलका पटवारी व कानूनगो ने चकबंदी में पूरी तरह से गलत चकबंदी कर रखी है और उनके तबादले की मांग अधिकारियों से कई बार मांग कर चुके हैं, लेकिन उनका तबादला नहीं किया गया है।
उन्होंने बताया कि इनके तबादलाें की मांग को लेकर तहसीलदार निर्मल दहिया को ज्ञापन भी सौंपा था। ग्रामीणों की कानूनगो, पटवारी की तबादले, मामले की निष्पक्षता से सीबीआई से जांच कराने, झूठे दर्ज मामलों को खारिज करने की मांग पूरी न होने पर ग्रामीण मंगलवार को गांव से पलायन करेंगे और दिल्ली जंतर मंतर पर कूच करेंगे।
उन्होंने बताया कि पांचों गांवों के सैकड़ों महिला, पुरुष व बच्चे दिल्ली जाएंगे। उन्होंने बताया कि दिल्ली में राष्ट्रीय कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से मिलेंगे। अगर फिर भी सरकार ने ग्रामीणों की मांगों को पूरा नहीं किया तो जंतर मंतर पर अनिश्चितकालीन धरना देंगे।