- गेहूं और जौ के शोध और विकास को और ऊंचाइयों पर पहुंचाया जाएगा : डॉ. रतन
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह के सेवानिवृत्त होने के बाद लंबे समय से भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (आईआईडब्ल्यूबीआर) में ही कार्यरत प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रतन तिवारी को संस्थान का नया निदेशक बनाया गया है। उन्होंने मंगलवार को बतौर निदेशक कार्यभार ग्रहण कर लिया है।
भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान में डॉ. रतन तिवारी ने वर्ष 1993 में बतौर वैज्ञानिक ज्वाइन किया था। इसके बाद वह लगातार इसी संस्थान में वरिष्ठ और प्रधान वैज्ञानिक के रूप में कार्य करते रहे। उन्होंने जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
वह कई किस्मों के प्रजनक भी रहे हैं। संस्थान की एक महत्वपूर्ण किस्म डीबी डब्ल्यू 88 की वजह से किसानों के बीच उन्हें खासी लोकप्रियता भी मिली। काशी हिंदू विश्वविद्यालय बनारस से कृषि में स्नातक के बाद यही से एमएससी और आनुवंशिकी और पादप प्रजनन विषय में गेहूं की फसल पर पीएचडी की उपाधि ली।
डॉ. तिवारी मूलरूप से इलाहाबाद के मेजा के निवासी हैं और फिर शिक्षा के लिए बनारस में परिवार सहित प्रवास करने लगे। संस्थान में आईएआरआई मेगा हब की शुरुआत करने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संस्थान के अधिकारियों व कर्मचारियों ने उनके निदेशक बनने पर स्वागत किया। मौके पर डॉ. तिवारी ने कहा कि संस्थान अपने सभी हितधारकों की सेवा में सदैव तत्पर रहेंगे। गेहूं और जौ के शोध और विकास को और ऊंचाई पर ले जाने का हर संभव प्रयास करेंगे। शोध कार्यो को गति दी जाएगी।