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साफ्टवेयर की त्रुटि से विद्यार्थियों के अकाउंट में पहुंची डबल राशि

Wed, 05 Apr 2017 11:52 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, करनाल
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शिक्षा विभाग की एक गलती का खामियाजा अब विद्यार्थियों को भुगतनी पड़ रही है। यूनिफार्म ग्रांट साफ्टवेयर की त्रुटि के कारण विभाग ने सैकड़ों विद्यार्थियों के बैंक खाते में डबल राशि भेज दिया है। जिन विद्यार्थियों के खाते में ज्यादा रकम आई है, और वे स्कूल छोड़ने जा रहे तो ऐसे बच्चों की एसएलसी रोकने का फरमान सुनाया गया है। आदेश दिए गए हैं कि विद्यार्थी जब तक यूनिफार्म के रुपये जमा नहीं करवाता है तो उसे स्कूल रि-लिविंग सर्टिफिकेट जारी न किया जाए। यह निर्देश हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद के राज्य परियोजना निदेशक की तरफ से करनाल के अलावा अंबाला, भिवानी, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गुरुग्राम, हिसार, झज्जर, जींद, कैथल, कुरुक्षेत्र जिले के जिला शिक्षा अधिकारियों को जारी किया गया है।
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निदेशक की ओर से जारी पत्र में कहा गया कि है कि संबंधित जिले के कुछ विद्यार्थियों के बैंक खाते में यूनिफार्म ग्रांट की राशि साफ्टवेयर की त्रुटि के कारण दो बार भेज दी गई है। जिसके चलते निर्णय लिया गया है कि कक्षा एक से सात में पढ़ने वाले बच्चे जिनको यूनिफार्म ग्रांट दो बार भेजी गई है उसमें से एक ग्रांट को अगले वर्ष 2017-18 के लिए मान लिया जाए। वहीं, जो विद्यार्थी स्कूल छोड़ कर दूसरे स्कूल में जाना चाहता है और स्कूल से एसएलसी ले रहा है तो ऐसी स्थिति में यूनिफार्म ग्रांट के अतिरिक्त मिली ग्रांट की राशि वापस लिए बिना उसे एसएलसी जारी न किया जाए। इसके अलावा कक्षा सातवीं पास कर कक्षा आठ में पहुंचने वाले विद्यार्थी से भी अतिरिक्त यूनिफार्म ग्रांट को वापस लिया जाना है। बच्चे को एसएलसी केवल तभी जारी किया जाए जब उसके द्वारा ग्रांट स्कूल में जमा करवा दी जाए। ग्रांट को एसएमसी या एएमडीसी अकाउंट में जमा करवाया जाए।

पहली बार जारी की आनलाइन राशि
शिक्षा विभाग ने यूनिफार्म ग्रांट की राशि में गड़बड़ी और घोटाले को रोकने के लिए पहली बार विद्यार्थियों के खाते में राशि जारी की थी। ये राशि सिर्फ उन्हीं छात्रों को दी गई है जिनके बैंक अकाउंट के साथ आधार कार्ड लिंक हुए हैं। विभाग ने ऐसे छात्रों की लिस्ट बनाकर उनके अकाउंट में पैसे डाले थे। लेकिन विभाग की गलती के कारण एक विद्यार्थी के खाते में दो बार ग्रांट जारी हो गई, साथ ही कई विद्यार्थी ऐसे भी हैं, जिनको राशि मिली ही नहीं। राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के राज्य महासचिव दीपक गोस्वामी ने बताया कि पहले ये राशि डीडीओ के पास जाती थी, जिससे पता होता था कि किस विद्यार्थी को यूनिफार्म देनी है और उसे मिल पाया या नहीं। गोस्वामी ने कहा कि सरकार की यह पहल अच्छी है लेकिन इसमें अभी कई कमियां हैं, जिन्हें विभाग को दूर करनी पड़ेंगी। इसके अलावा ऐसा सिस्टम भी लागू किया जाए, जिससे ग्रांट के बारे में स्कूल इंचार्ज को भी पूरी तरह पता लग सके।
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हजारों छात्रा को गुजरना पड़ेगा परेशानी से
विभाग की इस गड़बड़ी से उन छात्रों को कोई परेशानी नहीं होगी, जो उसी स्कूल में सातवीं तक पढ़ाई जारी रखेंगे। लेकिन ऐसे छात्रों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जो या तो एक स्कूल से दूसरे स्कूल में पढ़ाई करने जा रहे हैं या फिर आठवीं में पहुंच चुके हैं। ऐसे छात्र व अभिभावक से एसएमसी पाने के लिए स्कूल के चक्कर लगा रहे हैं। एक शिक्षा अधिकारी ने बताया कि इस गड़बड़ी के बारे में तो पता चल गया है, लेकिन अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि जिले में कितने छात्रों के अकाउंट में दो बार पैसा पहुंचा है और कितने के अकाउंट में पैसा पहुंचा ही नहीं। स्कूल के स्तर पर ऐसे छात्रों की लिस्ट बनाई जा रही है।

विभाग से निर्देश मिल चुका है
शिक्षा विभाग निदेशालय से निर्देश मिल चुका है, जिसके अनुसार जिन विद्यार्थियों के खाते में यूनिफार्म की डबल राशि जारी हुई है, उनके स्कूल छोड़ने पर अतिरिक्त राशि वापस ली जाए। इसकी जिम्मेदारी स्कूल मुखिया की होगी। इस बारे में सभी को अवगत करवा दिया गया है।
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- सुरेश गौरेया, जिला शिक्षा अधिकारी, करनाल।
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